तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय राजगीर महोत्सव का हुआ आगाज, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने किया उद्घाटन

तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय राजगीर महोत्सव का हुआ आगाज, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने किया उद्घाटन

NALANDA : राजगीर के अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में आयोजित तीन दिवसीय राजगीर महोत्सव का आज आगाज हो गया. इसका उद्घाटन बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दीप प्रज्वलित कर किया. इस मौके पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि पंच पहाड़ियों से घिरा राजगीर प्रकृति का अनोखा संगम है. यही वजह है की भारी संख्या में यहाँ देशी विदेशी पर्यटक आते हैं. महाभारत कालीन मगध नरेश जरासंध की यह राजधानी थी. भगवान बुद्ध को राजगीर बहुत प्रिय स्थल था. उन्होनें वेणुवन में कई वर्षों तक वर्षावास किया था.

 ये ही नहीं राजगीर ही एक ऐसा क्षेत्र है जहाँ प्रत्येक तीन वर्ष में मलमास मेला लगता है. कहा जाता है कि 33 करोड़ देवी देवता एक महीने तक यहाँ प्रवास करते है. मुख्यमंत्री ने कहा की हजरत मखदुम साहब भी यहाँ आए थे. सिख धर्म के संस्थापक गुरुनानक देव जी महाराज ने राजगीर में शीतल कुंड का निर्माण कराया था. जबकि यहाँ आस पास में गर्म कुंड के ही झरने है. राजगीर में निर्माण हो रहे अंतर्राष्ट्रीय नालन्दा विश्वविद्यालय, जिसके कारण नालन्दा का नाम एक बार फिर देश दुनिया में शिक्षा के क्षेत्र में ख्याति प्राप्त करेगा. यही पर अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम और फ़िल्म सिटी का भी निर्माण किया जा रहा है. मुख्यमंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय नालंदा विश्वविद्यालय में ही अंतरराष्ट्रीय समस्याओं के समाधान के लिए कॉन्फ्लिक्ट रेव्युलेशन सेंटर का भी निर्माण कराया जाएगा. जहाँ देश दुनिया के लोग एक जगह बैठकर शांति जैसे मुद्दों पर चर्चा कर सकेगें. 

गुरुनानक देव के 550 वें प्रकाश पर्व के मौके पर तीन दिवसीय कार्यक्रम का भी आयोजन 27 से 29 दिसम्बर तक राजगीर में भी होगा. इसके पूर्व हमने 25 अक्टूबर को विश्व शांति स्तूप का 50 वां वर्षगाँठ मनाया. विश्व शांति स्तूप पर जाने के लिए नए रोप वे का निर्माण कराया जा रहा है. मुख्यमंत्री ने शराबबंदी पर बोलते हुए कहा कि कोई व्यक्ति धार्मिक स्थल पर शराब पीने नहीं  जाता है. कुछ लोगों को सिर्फ बोलने से मतलब है. कहते थे कि शराबबंदी से पर्यटकों की संख्या घटेगी. लेकिन आज हर वर्ष उनकी संख्या बढ़ रही है. उन्होंने कहा कि बढ़ते प्रदूषण को लेकर हमने जल, जीवन और हरियाली मिशन की शुरुआत की है. खेतों में पराली न जलावे और न ही भू-जल स्तर को कम होने दें. 

नालंदा से राज की रिपोर्ट  



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