LJP चीफ के मकसद का आखिर क्या है मुकाम? भभकते 'चिराग' को कौन दे रहा है शह, पूरी तफ्तीश

LJP चीफ के मकसद का आखिर क्या है मुकाम? भभकते 'चिराग' को कौन दे रहा है शह, पूरी तफ्तीश

PATNA :  बिहार विधानसभा चुनाव की सरगर्मियों के बीच लोजपा चीफ आजकल पूरे लाइमलाइट में हैं. लोजपा की कमान संभालने के बाद अब चिराग पासवान इस चुनाव में अपने पार्टी का विस्तार करना चाहते हैं. विस्तार के लिए सियासी रंज जरुरी था तो चिराग ने सीएम नीतीश के नेतृत्व पर ही सवाल उठाकर रार का ऐलान कर दिया. लेकिन सवाल ये है कि एनडीए गठबंधन में होते हुए नीतीश सरकार के काम पर सवाल उठाने का आखिर चिराग पासवान के मकसद का मुकाम है क्या?

आखिर क्यों भभक रहे हैं चिराग
बिहार विधानसभा चुनाव की आहट को देखते ही चिराग पासवान ने अपना लाइन क्लीयर कर दिया था. कोरोना काल में चिराग पासवान ने बिहार सरकार की जमकर मुखालफत की. सरकारी अस्पातलों के खस्ता हाल मुद्दा हो या फिर बिहार में अपराध का ग्राफ. इन सब को लेकर लेकर लोजपा चीफ ने जमकर नीतीश सरकार की मुखालफत की. लेकिन सीएम नीतीश कुमार की तरफ से चुप्पी ने चिराग को और बल दिया. लेकिन एक वक्त के बाद सीएम नीतीश के सिपाहियों ने लोजपा चीफ को जवाब देना शुरू किया. 

जवाबी कार्रवाई के बाद कुछ दिनों के लिए चिराग ने चुप्पी साध ली. लेकिन चुनाव के करीब आते ही चिराग ने एक इंटरव्यू में अपना दर्द सबके सामने बयां कर डाला. चिराग ने साफ तौर पर कहा कि सीएम नीतीश कुमार मुझसे बात तक नहीं करते. यहां से शुरू होता है चिराग के भभकने का दौरा. चिराग के बागी तेवर को सीएम नीतीश कुमार पहले ही भांप चुके थे. लिहाजा लोजपा पर हमला करवाने के लिए उन्होंने मांझी को बतौर सिपाही एनडीए में शामिल करवा लिया. फिर क्या था माझी की एनडीए में एंट्री ने लोजपा चीफ चिराग पासवान को और गरमा दिया. अखबारों में विज्ञापन छपा और चिराग ने अपनी मंशा सबसे सामने जाहिए कर दी.

इस 'चिराग' की कौन कर रहा है 'रखवाली'
लेकिन इन सब के बीच लोजपा चीफ चिराग पासवान ने अपनी हैसियत बताने के लिए संसदीय दल की बैठक में 143 सीटों पर चुनाव लड़ने की बात कह डाली. साथ ही अंदरखाने से यह खबर भी आई की लोजपा जेडीयू कैंडिडेट के खिलाफ उम्मीदवार उतारेगी. लेकिन समझने वाली बात है आखिर चिराग पासवान के इस मकसद का मुकाम क्या है? आखिर चिराग पासवान किसकी शह पर बिहार की राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले नीतीश कुमार से टकरा रहे हैं? दरअसल राजनीतिक जानकारों का कहना है कि एलजेपी को लगता है कि जीतनराम मांझी की वजह से उसका नुकसान हो सकता है. दूसरी ओर चिराग ज्यादा से ज्यादा सीटों की साझेदारी चाहते हैं इसलिए यह दबाव डालने की कोशिश हो रही है.

 जबकि अंदरखाने यह चर्चा तेज है कि बीजेपी खुद ही चाहती है कि एलजेपी एनडीए से बाहर चुनाव लड़ें. क्योंकि माना जा रहा है कि चिराग अपने प्रत्याशी बीजेपी के खिलाफ नहीं उतारेंगे लेकिन जेडीयू के खिलाफ जरूर उतारेंगे. अगर एलजेपी, जेडीयू की 10 सीटें भी कम कर देती है तो एनडीए में बीजेपी नीतीश पर हावी हो जाएगी. लेकिन सियासी कयासों के बीच चिराग पासवान क्या फैसला लेते हैं और बीजेपी इस फैसले पर कैसे रियेक्ट करती है ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा.

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