चिराग पासवान ने बाढ़ग्रस्त राघोपुर का किया दौरा, कहा- 16 सालों से बाढ़ राहत के नाम पर हो रहा घोटाला

चिराग पासवान ने बाढ़ग्रस्त राघोपुर का किया दौरा, कहा- 16 सालों से बाढ़ राहत के नाम पर हो रहा घोटाला

पटना. लोक जनशक्ति पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान ने आज वैशाली जिले के राघोपुर विधानसभा अर्न्तगत बाढ़ प्रभावित गांवों का दौरा किया. इस दौरान चिराग दियारा इलाके में बहरामपुर पंचायत के मदहा गांव में बीते दिनों एक ही परिवार के दो सदस्यों के बाढ़ में डुबने से हुई मौत से शोकसंतप्त परिवारों से मिलकर उन्हें सांत्वना और शोक संवेदना व्यक्त की. इसके बाद चिराग ने बाढ़ से प्रभावित परिवारों के बीच पार्टी की ओर से राहत समाग्री का वितरण किया और बाढ़ की समस्या से प्रभावित परिवारों के राहत और पुनर्वास को लेकर जिले के अधिकारियों से दूरभाष पर अवश्यक सहयोग करने को कहा.

इस दौरान चिराग ने कहा कि प्रत्येक वर्ष बाढ़ से दियारे के लोगों का जन जीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो जाता है. ऐसे में मौजूदा सरकार को बाढ़ की विभिषिका से राहत और बचाव का कार्य की मुकम्मल तैयारी करने की जरूरत है, जिसे हर वर्ष राज्य सरकार नजर अंदाज करती है. इससे प्रदेश भर में सैकड़ों जान-माल की क्षति होती है और सैकड़ों लोग बेघर हो जाते हैं, जिसकी कोई सुधि नहीं लेता, जो बेहद चिंता का विषय है. चिराग ने राज्य सरकार से बाढ़ पीड़ितों के प्रति संवेदनशिलता बरतने की अपील की है. चिराग ने कहा  कि प्रदेश के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सिर्फ बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों मे खानापूर्ति करते नजर आ रहे हैं, जबकि बाढ़ की विभिषिका से पूरे प्रदेश की हलात बहुत ही भीषण हो गई है.

प्रदेश की एक बड़ी आबादी बुरी तरह बाढ़ से प्रभावित है. बाढ़ को लेकर प्रत्येक वर्ष एक बड़ी रकम का गबन बाढ़ राहत के नाम पर पिछले 16 सालों से किया जा रहा है, जबकि स्थिति जस की तस बनी हुई है. बाढ़ राहत और बचाव के नाम पर केंद्र सरकार से लगातार प्रदेश की सरकार को विशेष सहायता राशि भी भेजी जाती है, जो बाढ़ प्रभावितों तक नहीं पहुंच पाता और आला अधिकारी और नेताओं के बीच उसका बंदरबाट हो जाता है, जो बेहद दुखद है.

प्रदेश के 16 जिलों के लगभग 70 लाख आबादी बुरी तरह बाढ़ की चपेट में हैं. बाढ़ प्रभावित जिलों में हजारों की संख्या में लोग बेघर हो गए हैं, उनका जीवन बसर एक बड़ी चुनौती बन कर रह गई है. ऐसे में मुख्यमंत्री बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का सिर्फ हवाई दौरा और तफरी करते नजर आ रहे हैं. प्रदेश की सरकार कोई भी ठोस निर्णय लेने में संवेदनशीलता नहीं दिखा पा रही है. इससे स्पष्ट हो जाता है कि बाढ़ और बाढ़ प्रभावितों के नाम पर प्रदेश के मुख्यमंत्री सिर्फ और सिर्फ ढोंग कर रहे हैं, जबकि बाढ़ से प्रदेश भर में अब तक कई दर्जन लोगों की जानें चली गई हैं और विशेषकर ग्रामीण इलाकों में पशुपालन से जुड़े लोगों के लिए पशुओं के रखरखाव और पशुओं के चारे की समस्या एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है.

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