पहली बार हाईकोर्ट के सिटिंग जज पर दर्ज होगी FIR, सुप्रीम कोर्ट ने CBI को दी अनुमति

पहली बार हाईकोर्ट के सिटिंग जज पर दर्ज होगी FIR, सुप्रीम कोर्ट ने CBI को दी अनुमति

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई ने एक अप्रत्याशित फैसला दिया है। सीजेआई ने सीबीआई को इलहाबाद हाई कोर्ट में कार्यरत जज जस्टिस एसएन शुक्ला के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधी कानून के तहत मुकदमा दर्ज करने की अनुमति दे दी। जस्टिस शुक्ला पर एमबीबीएस पाठ्यक्रम में दाखिले के लिए कथित तौर पर प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों का पक्ष लेने का आरोप है।

हाई कोर्ट में कार्यरत किसी भी जज के खिलाफ 1991 से पहले किसी भी एजेंसी ने किसी भी मामले में जांच नहीं की थी। तब से यह पहला मामला है, जब सीजेआई ने एक जांच एजेंसी को एक सिटिंग जज के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की अनुमति दी है। सीबीआई जल्द ही जस्टिस शुक्ला के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराएगी। संभव है कि जस्टिस शुक्ला भ्रष्टाचार निरोधी कानून के तहत गिरफ्तार भी कर लिए जाएं।

पिछले महीने सीजेआई जस्टिस रंजन गोगोई ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर जस्टिस शुक्ला को हटाने का प्रस्ताव संसद में लाने को कहा था। 19 महीने पहले पूर्व चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने भी यही सिफारिश की थी जब एक आंतिरक समिति ने जस्टिस शुक्ला को गंभीर न्यायिक कदाचार का दोषी पाया था। पीएम मोदी को पत्र लिखने से पहले सीजेआई गोगोई ने न्यायिक कार्य फिर से आवंटित करने का जस्टिस शुक्ला का आग्रह खारिज कर दिया था।

जस्टिस शुक्ला के खिलाफ कदाचार की उत्तर प्रदेश के महाधिवक्ता राघवेंद्र सिंह की शिकायत पर सितंबर 2017 में सीजेआई दीपक मिश्रा ने एक आंतरिक जांच समिति गठित कर दी थी। इस समिति में मद्रास हाई कोर्ट की तत्कालीन चीफ जस्टिस इंदिरा बनर्जी, सिक्किम हाई कोर्ट के तत्कालीन चीफ जस्टिस एस के अग्निहोत्री और मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस पीके जयसवाल शामिल थे।

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