पटना DTO में करोड़ों के 'घपले' में क्लर्क सस्पेंड, डीटीओ पर कब होगा एक्शन...क्या बड़ी मछली को बचाने की है कोशिश?

 पटना DTO में करोड़ों के 'घपले' में क्लर्क सस्पेंड, डीटीओ पर कब होगा एक्शन...क्या बड़ी मछली को बचाने की है कोशिश?

PATNA: सुशासन की सरकार में पिछले साल करोड़ों का घोटाला हुआ था। घोटालेबाजों के गिरोह का जब ट्रांसफर हुआ इसके बाद पूरे घपले से पर्दा उठा । विभाग ने मामले को गंभीर देख और मीडिया में खबर के बाद जांच टीम गठित की थी। फिर खास को फंसते देख जांच के नाम पर फाइल को दबा दिया गया। मीडिया में जब सुशासन की सरकार की भद्द पिटी तो जांच की गाड़ी आगे बढ़ी। पटना के डीटीओ ऑफिस में करोड़ों के घोटाले का खुलासा हुए 6 माह से बीत गए। न्यूज4नेशन ने इस घोटले को उजागर किया था। परिवहन विभाग के अधिकारी दोषियों को बचाने में जुटे थे। आखिरकार घोटालेबाजों को बड़े हाकिमों द्वारा बचाने की मुहिम सफल नहीं हो सकी। परिवहन विभाग ने माना कि सरकारी कर्मियों ने सरकारी राजस्व की क्षति पहुंचाई .इसके बाद एक कर्मी को सस्पेंड किया गया है। हालांकि इस बड़े घोटाले में बड़े गुनाहगारों पर अभी कोई कार्रवाई नहीं की गई है। बताया जाता है कि परिवहन विभाग ने एक क्लर्क को निलंबित कर मामले पर पर्दा डालने की कोशिश में जुट गई है। जबकि जिसके आदेश से करोड़ों का खेल खेला गया उस पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। 

परिवहन आयुक्त ने किया सस्पेंड

परिवहन विभाग ने पटना डीटीओ ऑफिस के तत्कालीन लिपिक अमित कुमार गौतम को निलंबित कर दिया है. 20 मार्च को निलंबन का आदेश जारी किया गया है. बिहार के परिवहन आयुक्त ने आदेश में कहा गया है पटना डीटीओ ऑफिस का तत्कालीन लिपिक अमित कुमार गौतम गलत तरीके से वाहनों को बैकलॉग एंट्री एवं निबंधन साथ ही साक्ष्य छुपाने के लिए वाहनों का ब्लैक लिस्ट करता था .गौतम के गलत ढंग से किए गए निबंधन के कारण सरकारी राजस्व की भारी क्षति हुई है. इनके विरुद्ध लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया प्रमाणित होते हैं. प्रमाणित आरोपों के लिए जांच समिति ने इन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए विभागीय कार्यवाही की अनुशंसा की थी। उक्त आलोक में अमित कुमार गौतम लिपिक जिला परिवहन कार्यालय भोजपुर को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है. इसके विरुद्ध  अलग से आरोप पत्र गठित कर विभागीय कार्यवाही का संचालन किया जाएगा. परिवहन आयुक्त ने अपने आदेश में कहा है कि पटना के डीटीओ ने 17 सितंबर 2020 को प्रतिवेदन भेजा था. जिसके बाद 19 सितंबर 2020 को जांच के लिए कमेटी की गठित की गई. कमेटी ने सभी आरोपों की जांच की. इस दौरान लिपिक से भी स्पष्टीकरण की मांग की गई। लेकिन उनका जवाब स्वीकार योग्य नहीं पाया गया। इसके बाद लिपिक को निलंबित किया गया है। 

तत्कालीन डीटीओ व अन्य पर कब होगा एक्शन?

परिवहन विभाग ने बड़े घोटाले में सिर्फ एक छोटे कर्मी को सस्पेंड किया है। लेकिन मास्टरमाइंड पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। पटना डीटीओ ने परिवहन विभाग को भेजे प्रतिवेदन में स्पष्ट उल्लेख किया था कि यह खेल लिपिक अमित कुमार गौतम के आईडी एवं तत्कालीन डीटीओ अजय कुमार ठाकुर के आईडी से किया गया। ऐसे में 6 महीने बाद सिर्फ क्लर्क को सस्पेंड करने से कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।अब बड़ा सवाल यही है कि घपले के सरगना पर कब कार्रवाई होगी। पटना डीटीओ दफ्तर में हुए इस घपले में परिवहन विभाग में तैनात एक अधिकारी की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। क्यों कि लंबे समय तक पटना डीटीओ में खुल्मखुल्ला खेल चल रहा था और जिन्हें पूरे प्रोसेस की निगरानी का जिम्मा था वे चुप्पी साधे थे। अगर निष्पक्ष रूप से जांच हो तो इसमें कई अन्य अधिकारी व कर्मी नप सकते हैं। 

17 सितंबर 2020 को भारी गड़बड़ी का हुआ था खुलासा

पटना के डीटीओ ने पत्रांक-3318 से 17 सितंबर 2020 को करोड़ों के घोटाले से पर्दा उठाया था । अधिकारी ने परिवहन कमिश्नर सीमा त्रिपाठी को इसके बारे में सबूत के साथ तीन पन्नों की रिपोर्ट दी थी। 17 सितंबर से लेकर 18 मार्च तक फाइल को गोपनीय रखा गया। जांच की गाड़ी कहां तक पहुंची यह बताने के लिए कोई तैयार नहीं था। बिहार परिवहन मंत्री शीला कुमारी भी इस बड़े गड़बड़ी के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं होने से भौचक्के और आश्चर्य चकित थे. उन्होंने विस में न्यूज4नेशन से बातचीत में कहा था कि वे इस पूरे मामले को दिखवाते हैं। 6 महीने बाद परिवहन विभाग ने एक क्लर्क को सस्पेंड किया है।   

जानिए पूरा मामला

पटना के तत्कालीन डीटीओ-कर्मी की मिलीभगत से वाहन BS-4 वाहन का बिना सरकारी राजस्व के ही निबंधन और चोरी की गाड़ी का भी निबंधन किया गया था. इस कारनामें से सरकार को पचास करोड़ से अधिक के राजस्व की क्षति हुई थी। इसके साथ ही तत्कालीन डीटीओ अजय कुमार ठाकुर और कर्मी अमित कुमार गौतम पर कई अन्य आरोप लगे थे। वर्तमान डीटीओ ने 17 सितंबर को  अपनी रिपोर्ट परिवहन कमिश्नर को भेज दिया था,जिसमें पूरे मामले की जांच कराने और जिम्मेदार अधिकारी और कर्मी पर कार्रवाई करने का आग्रह किया गया था। डीटीओ के घोटाले वाले पत्र के बाद परिवहन कमिश्नर ने जांच के लिए कमेटी बनाई थी। तत्कालीन डीटीओ और कर्मी ने हर गुनाह किये लेकिन परिवहन विभाग के आलाधिकारी मौन साधे रहे। 

कंपनी ने गाड़ी बनाई नहीं और डीटीओ ने कर दिया निबंधन

पटना डीटीओ में जिस चेचिस नंबर की गाड़ी का निबंधन हुआ वह गाड़ी महिंद्रा कंपनी ने बनाई ही नहीं और निबंधन भी कर दिया गया। इसका खुलासा सोनपुर थाने में जब्त वाहन की जांच में हुआ है .उक्त स्कॉपियो वाहन का निबंधन 27 जून 2017 को हुआ था. स्कॉर्पियो वाहन निबंधन संख्या बीआर 01 पीजी- 8228 पटना डीटीओ में निबंधित है.

तत्कालीन डीटीओ-कर्मी की मिलीभगत से फर्जीवाड़ा

जांच में पता चला कि जिस चेचिस नंबर से निबंधन किया गया है उसका तो निर्माण ही नहीं हुआ है. पटना डीटीओ में हुए ऑडिट में उक्त वाहन पर टैक्स जमा नहीं होने का ऑब्जेक्शन लगाया गया था. वाहन के निबंधन के  समय तत्कालीन डीटीओ अजय कुमार ठाकुर थे, जिन पर पहले भी भ्रष्टाचार के कई गंभीर आरोप लगे हैं. अजय कुमार ठाकुर के कार्यकाल में सहायक अमित कुमार गौतम की देखरेख में ही पूरा निबंधन का काम होता था. जानकारों का कहना है कि इस दौरान सैकड़ों वाहनों का रजिस्ट्रेशन बिना टैक्स जमा किए गलत तरीके से हुआ.


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