क़ानूनी पचड़े में फंसे बिहार के कानून मंत्री पर सीएम नीतीश ने तोड़ी चुप्पी, कार्तिक सिंह पर मुख्यमंत्री का बड़ा बयान

क़ानूनी पचड़े में फंसे बिहार के कानून मंत्री पर सीएम नीतीश ने तोड़ी चुप्पी, कार्तिक सिंह पर मुख्यमंत्री का बड़ा बयान

पटना. अपहरण के एक मामले में आरोपी बिहार के कानून मंत्री कार्तिक सिंह के खिलाफ कोर्ट की भाषा में फरारी होने पर अब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी चुप्पी तोड़ी है. उन्होंने बुधवार को अपने दागी मंत्री से जुड़े सवाल पर गोलमटोल जबाव दिया. सीएम नीतीश से पूछा गया कि उनके कानून मंत्री कार्तिक सिंह के फरार चल रहे हैं. उनके खिलाफ कोर्ट ने वारंट जारी कर रखा है. उनके खिलाफ अपहरण का गंभीर आरोप है. इस ममले में विपक्ष भी कार्तिक सिंह पर हमलावर है सरकार में पुलिस से फरार चल रहे व्यक्ति को मंत्री बनाने की आलोचना कर रहा है. तो क्या ऐसे में सीएम नीतीश अपने आरोपी मंत्री को हटायेंगे. 

नीतीश कुमार ने कहा कि फिलहाल उन्हें इस मामले की कोई जानकारी नहीं है. वे नहीं जानते कि कार्तिक सिंह से जुड़ा क्या विवाद है. उनके खिलाफ कोर्ट ने किस प्रकार का आदेश जारी है. उन्होंने पूरे मामले में खुद की अनभिज्ञता प्रकट की. साथ ही इस पर और कुछ भी बोलने से बचते रहे. यहां तक कि अगर यह मामला सही होता है तो क्या वे अपने मंत्री को हटा सकते हैं, इस पर भी सीएम नीतीश ने कुछ नहीं बोला. उन्होंने कहा कि वे कुछ नहीं जानते. 

पटना के बिल्डर का वर्ष 2014 में अपहरण हुआ था. इस मामले में मोकामा के पूर्व विधायक अनंत सिंह सहित कार्तिक सिंह को भी आरोपी बनाया गया है. इसी साल पटना क्षेत्र से एमएलसी का चुनाव जीतने वाले कार्तिक सिंह उर्फ़ मास्टर को मोकामा के पूर्व विधायक अनंत सिंह का नजदीकी माना जाता है. पहली बार एमएलसी का चुनाव जीतने के बाद भी उनके मंत्री बन जाने को राजनीतिक गलियारों में बड़े आश्चर्य के रूप में देखा गया. अपने पेशेवर जीवन की शुरुआत एक शिक्षक के रूप में करने वाले कार्तिक सिंह के कानून मंत्री बनने पर अब उनके साथ विवाद जुड़ा है. हालांकि कार्तिक का कहना है कि उन्हें लेकर भ्रामक खबरें प्लांट की जा रही है और कानून के प्रावधानों को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है. 


दरअसल, वर्ष 2014 के जिस अपहरण कांड में कानून मंत्री कार्तिक सिंह को कोर्ट की नजर में फरारी बताया जा रहा है उसमें उन्हें अदालत ने ही राहत दे रखी है. इस मामले में कार्तिक ने अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, तृतीय व्यवहार न्यायालय, दानापुर ने इस मामले में सुनवाई की थी. 12 अगस्त 2022 को जारी अदालत में आदेश में मोकामा थाना को कहा गया था कि कार्तिकेय सिंह उर्फ़ मास्टर साहेब को 1 सितम्बर 2022 तक no coercive प्रदान किया जाता है.

कार्तिक सिंह ने इसके पूर्व पटना हाई कोर्ट में जमानत याचिका दायर की थी. हाई कोर्ट ने 16 फरवरी 2017 को कार्तिक सिंह की जमानत याचिका ख़ारिज करते हुए उन्हें निचली अदालत में जाने कहा था. कार्तिक ने फिर निचली अदालत में याचिका दायर की. अब कोर्ट ने अपने ताजा आदेश में मोकामा थाना के नाम से जारी आदेश में कार्तिक सिंह को गिरफ्तार करने या उनके खिलाफ किसी प्रकार की जोर जबरदस्ती नहीं करने का निर्देश दिया है. कानून की भाषा में इसे no coercive कहा जाता है. इसका मतलब होता है कि गिरफ्तारी या किसी प्रकार की दंडात्मक पुलिस कर्रवाई से छूट मिलना. 


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