नीतीश की घेराबंदी के लिए बीजेपी ने रचा चुनावी चक्रव्यूह!, आंकड़ों के सहारे सियासत के शतरंज पर बिछी बिसात

नीतीश की घेराबंदी के लिए बीजेपी ने रचा चुनावी चक्रव्यूह!, आंकड़ों के सहारे सियासत के शतरंज पर बिछी बिसात

PATNA: बिहार विधानसभा चुनाव में फिलहाल साल भर का समय बचा है।लेकिन कुर्सी को लेकर एनडीए के दो प्रमुख दलों में घमासान मचना शुरू हो गया है।कल तक बिहारी राजनीति में छोटे भाई की भूमिका में रहने वाली बीजेपी की महत्वाकांक्षा जाग उठी है।अब सिर्फ सत्ता में भागीदारी नहीं बल्कि कुर्सी की दावेदारी भी चाहिए।कुर्सी पर दावेदारी को लेकर बयान भी तेजी से आने लगे हैं।सोमवार को बिहार बीजेपी के वरिष्ठ नेता संजय पासवान ने यह कहकर सियासी बवाल खड़ा कर दिया कि अब जेडीयू को बिहार की गद्दी भाजपा को सौंप देनी चाहिए।इतना हीं नहीं पासवान ने दो कदम आगे बढ़ते हुए यहां तक कह दिया कि नीतीश कुमार दिल्ली चले जायें।मतलब साफ है कि अब सत्ता की भागीदारी से अलग कुर्सी की जिम्मेदारी भाजपा लेने पर अड गई है।

बता दें कि 2005 से 2012 तक और फिर 2016 से अबतक  बिहार में एनडीए गठबंधन की सरकार चल रही है।बिहार विधानसभा चुनाव के अभी तक के आंकड़े यह बताने के लिए पर्याप्त हैं कि जेडीयू ने बीजेपी को हमेशा कमतर आंका है।लेकिन मोदी लहर का असर अब बिहार विधानसभा चुनाव पर भी देखने को मिलने लगा है।आखिर बीजेपी के उत्साह का की वजह क्या है जो सत्ता की भागीदारी से उपर उठते हुए कुर्सी की दावेदारी ठोक रही है।इसे ऐसे समझिए ...पूरी बात समझने के लिए 2019 लोकसभा चुनाव में भाजपा और जेडीयू को मिले वोट प्रतिशत पर गौर कीजिए।

भारतीय जनता पार्टी जहां एक तरफ 23.58 फीसदी वोट और 17 सीट लाकर टॉप पर है वहीं जनता दल यूनाईटेड 21.81 फीसदी वोट और 16 सीट लाकर दूसरे नंबर पर रही। जेडीयू मान रही कि यह वोट उनका है लेकिन बीजेपी का मानना है कि यह मोदी के लहर का असर है न कि नीतीश के काम या व्यक्तित्व का।

अब जरा 2014 के लोकसभा चुनाव के आंकड़ों पर गौर करिए..जहां 29.4 फीसदी वोट लाकर भाजपा टॉप पर थी वहीं जेडीयू 15.8 फीसदी वोट लाकर तीसरे स्थान पर रही।जेडीयू 2014 में अकेले लड़ी थी।अलबत्ता जब जेडीयू ने विधानसभा चुनाव में राजद के साथ गठबंधन किया तो यही आंकड़े बदल गए लेकिन विडंबना देखिए कि राजद के साथ जेडीयू बहुत दिनों तक चल नहीं सका।फिर अपने पुराने साथी के साथ नीतीश कुमार सत्ता पर काबिज हो गए।अब 2020 में फिर विधानसभा चुनाव आने वाला है लेकिन अभी से मोदी फैस्टर हावी होते दिख रहा है और लोकसभा चुनाव के आंकड़े भी जेडीयू को लगातार आंखे दिखा रहा है।अब समझ लीजिए कि इन्हीं आंकड़ों के आधार पर बीजेपी नेताओं के द्वारा नीतीश कुमार पर लगातार प्रहार किया जा रहा है।    


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