CM नीतीश के ड्रीम को लगा बड़ा झटका, सूबे में समय से पहले ही बंद हो गई पौधरोपण की 19 हजार योजनाएं, विभाग है अनजान

CM नीतीश के ड्रीम को लगा बड़ा झटका, सूबे में समय से पहले ही बंद हो गई पौधरोपण की 19 हजार योजनाएं, विभाग है अनजान

PATNA : बिहार में पर्यावरण को सुरक्षित व संरक्षित बनाने की सीएम नीतीश कुमार के सपने को बड़ा झटका लगा है। बताया गया कि प्रदेश में जल जीवन हरियाली के तहत पौधरोपण की 19,550 योजनाएं निर्धारित समय से पहले ही बंद कर दी गई है। यह वह योजनाएं हैं, जिन्हें पांच साल में पूरा किया जाना था, लेकिन एक-दो साल में इन्हें बंद कर दिया गया है। यहां तक कि इन योजनाओं को एमआईएस व गूगल सीट से भी डिलीट कर दिया गया है।

बेगूसराय में सर्वाधिक योजनाएं बंद की गई हैं। दूसरे नंबर पर समस्तीपुर जिला है। सबसे कम योजनाएं शेखपुरा में बंद की गई हैं।वहीं सबसे कम योजनाएं शेखपुरा जिले में बंद हुई हैं। सभी जिलों में पौधरोपण की बड़ी संख्या में योजनाओं को बंद कर दिए जाने से विभाग परेशान हैं।  अब मामला सामने आने के बाद मनरेगा आयुक्त सीपी खंडूजा ने सभी डीएम और डीडीसी को पत्र भेजकर पीओ से स्पष्टीकरण मांगने का आदेश जारी किया है। साथ ही जिला मुख्यालयों को 15 दिनों के अंदर ग्रामीण विकास विभाग के बिहार रूरल डेवलपमेंट सोसाइटी (बीआरडीएस) को रिपोर्ट भेजने का आदेश जारी किया है।

एमआईएस की समीक्षा में सामने आई बात

बता दें कि पौधरोपण की इन योजनाओं की मनरेगा की वेबसाइट एमआईएस पर एंट्री की जाती है। इसकी प्रविष्टि प्रखंडवार दर्ज की जाती है। इससे जिले में संचालित योजनाओं की जानकारी होती है। पिछले दिनों जल जीवन हरियाली के तहत पौधरोपण की योजनाओं को लेकर पिछले दिनों समीक्षा के बाद जब एमआईएस पर अवलोकन किया गया तो योजनाओं के डिलीट करने का राज खुल गया। अवलोकन से पता चला कि पौधरोपण की इन योजनाओं को निर्धारित समय के पूर्व डिलीट किया जा रहा है।

वन पोषकों को पांच साल तक किया जाता है भुगतान

विभागीय प्रावधन है कि पौधरोपण की योजनाएं पांच वर्षों के लिए खोली जाती हैं। पौधरोपण की तिथि से पांच वर्षों की अवधि तक इसकी सुरक्षा एवं रखवाली के लिए प्रत्येक एक योजना पर एक वन पोषक को रखा जाता है। उसे प्रतिदिन की निर्धारित मजदूरी की दर से पांच वर्षों तक भुगतान किया जाता है।



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