बिहार में गाड़ियों की फिटनेस टेस्ट में 'तकनीक' से तौबा, जांच के नाम पर 'मजाक'...अब CM नीतीश ने परिवहन विभाग को दिया ये आदेश

बिहार में गाड़ियों की फिटनेस टेस्ट में 'तकनीक' से तौबा, जांच के नाम पर 'मजाक'...अब CM नीतीश ने परिवहन विभाग को दिया ये आदेश

पटनाः बिहार में निबंधित करीब 10 लाख व्यवसायिक वाहनों के फिटनेस प्रमाण-पत्र का कोई इंतजाम नहीं है। बिना किसी जांच के ही परिवहन अधिकारी फिटनेस प्रमाण-पत्र जारी कर देते हैं. अधिकारियों की तरफ से हस्ताक्षर होते ही सड़क पर दौड़ने के लिए सभी गाड़ियां फिट हो जाती हैं। पूरे देश में शायद बिहार ऐसा पहला राज्य है जहां गाड़ियों के फिटनेस जांच की इस तरह की व्यवस्था है। परिवहन विभाग की जांच प्रणाली किसी मजाक से कम नहीं जहां एमवीआई बिना देखे ही प्रतिदिन सैकड़ों गाड़ियों का प्रमाण पत्र जारी कर देते हैं. विभाग की तरफ से दावे किये जाते हैं कि गाड़ियों की जांच कर फिटनेस प्रमाण पत्र दिया जाता है लेकिन बड़ा सवाल यही है कि जब सूबे में कहीं भी जांच केंद्र ही नहीं है तो फिर जांच कहां की जाती है। अब खुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने परिवहन विभाग को गाड़ियों के फिटनेस पर ध्यान देने का निर्देश दिया है। 

परिवहन विभाग सिर्फ फिटनेस प्रमाण-पत्र के लिए तकनीक से करता है तौबा 


जानकार बताते हैं कि परिवहन विभाग समय-समय पर इन कॉमर्शियल गाड़ियों का फिटनेस सर्टिफिकेट जारी करता है।इस तकनीक वाले युग में भी परिवहन विभाग के अधिकारी आंख से देखकर ही फिटनेस प्रमाण पत्र जारी कर रहे हैं। वर्ष 2003-04 में सरकार की तरफ से ऑनलाइन फिटनेस जांच केंद्र की मंजूरी दी गई थी,इसकी संख्या 40 थी. लेकिन अब सूबे में निजी क्षेत्र में एक भी ऑनलाइन फिटनेस केंद्र संचालित नहीं हैं।सभी फिटनेस केंद्र का लाइसेंस खत्म हो गया इसके बाद परिवहन विभाग की तरफ से कोई नया लाइसेंस जारी नहीं की गई है।वहीं दूसरी तरफ बिहार में सरकार का अपना कोई भी फिटनेस केंद्र नहीं है। फिटनेस का काम विभाग ने एमवीआई को सुपूर्द कर दिया है। सरकार के पास एक भी डिजिटल फिटनेस केंद्र नहीं है। एक तरफ परिवहन विभाग का सारा काम ड्राईविंग लाइसेंस से लेकर अदना सा काम ऑनलाइन और डिजिटल मोड में हो रहा,लेकिन फिटनेस प्रमाण पत्र एमवीआई के द्वारा आंख से देखकर ही जारी किया जा रहा है। कई जगहों से ऐसी शिकायत भी लगातार मिलती है कि एमवीआई बिना जांच के ही फिटनेस प्रमाण पत्र जारी कर दिया.

बिहार में करीब 9.6 लाख कॉमर्शियल वाहन

बिहार मोटर व्हेकिल फिटनेस एसोसिएशन की तरफ से परिवहन विभाग से ऑनलाइन फिटनेस को लेकर लाइसेंस निर्गत करने की मांग की जाती रही है।लेकिन परिवहन विभाग को एमवीआई के आंख पर ज्यादा भरोसा है।बिहार विधान मंडल में इस मामले को कोई दफे उठाया गया लेकिन सरकार मामले को उलझाती रही. परिवहन विभाग ने जून 2020 में विधान परिषद में पूछे गए सवाल का जवाब दिया था। तत्कालीन मंत्री संतोष निराला की तरफ से दिए गए जवाब में कहा गया कि बिहार में 9 लाख 57 हजार निबंधित कॉमर्शियल वाहन हैं। 2015 से बिहार में संचालित निजी फिटनेस केंद्र के नवीकरण एवं नये फिटनेस केंद्र के लाइसेंस की स्वीकृति पर रोक है। मोटर यान निरीक्षक की तरफ से व्यवसायिक वाहनों की जांच कर फिटनेस प्रमाण पत्र दिया जाता है।हालांकि तब मंत्री जी यह नहीं बता पाये थे कि बिहार में ऑनलाइन गाड़ियों की जांच कर फिटनेस देने का काम कब शुरू होगा. जानकार बताते हैं कि परिवहन विभाग में आज भी गाड़ियों के फिटनेस जांच में उच्च तकनीक का इस्तेमाल नहीं होने के पीछे बड़ी वजह है।जिस कारण आज भी एमवीआई के आंखों पर ही विश्वास किया जा रहा है।

सीएम नीतीश ने दिया आदेश

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 2021 के पहले दिन परिवहन विभाग की समीक्षा की और अधिकारियों को कई निर्देश दिए. मुख्यमंत्री ने परिवहन विभाग को निर्देश दिया कि वाहनों की फिटनेस पर विशेष ध्यान दें ताकि दुर्घटना पर लगाम लग सके और अनफिट गाड़ियां सड़क पर नहीं दौड़े. सीएम ने अफसरों से कहा कि फिटनेस जांच को लेकर सक्रिय हों और विशेष ध्यान दें. मुख्यमंत्री ने कहा कि ओवरलोडिंग रोकने के लिए स्पेशल ड्राइव चलाएं. वाहनों में प्रदूषण नियंत्रण के लिए भी सभी जरूरी उपाय करें. ड्राइविंग परीक्षण के पूर्व लोगों को ड्राइविंग में प्रशिक्षित किया जाए. इसके लिए प्राइवेट ट्रेनिंग सेंटर के माध्यम से लोगों को प्रशिक्षण के लिए प्रोत्साहित करें .इसके साथ ही सभी जिलों में टेस्टिंग सेंटर बनाएं.


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