सीएम नीतीश की ‘जल जीवन हरियाली’ यात्रा शुरु, कहा- 19 जनवरी को बनेगी सबसे लंबी मानव श्रृंखला

सीएम नीतीश की ‘जल जीवन हरियाली’ यात्रा शुरु, कहा- 19 जनवरी को बनेगी सबसे लंबी मानव श्रृंखला

BETTIAH: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंगलवार को पश्चिम चंपारण जिले के चंपापुर से जल-जीवन-हरियाली यात्रा की शुरुआत की। यहां उन्होंने जल-जीवन-हरियाली को लेकर आयोजित जागरूकता सम्मेलन में भाग लिया। लोगों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यावरण से छेड़छाड़ ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि तालाब का जीर्णोद्धार किया जा रहा है। जितने पोखर, पईन, कुएं हैं, सबका जीर्णोद्धार करेंगे‌। सार्वजनिक चापाकल को चलाते रहेंगे। सोख्ता का निर्माण होगा। इसका बहुत लाभ होगा। इनका संरक्षण आवश्यक है।

सीएम नीतीश ने गांव के पड़री पोखर के किए गए सौंदर्यीकरण व जीर्णोद्धार का जायजा लिया। पोखरा के तट पर लगाए गए पांच हजार से अधिक वृक्षों की रौनक देखकर सीएम ने खुशी जताई। नीतीश ने कहा कि 19 जनवरी को अब तक की सबसे लंबी मानव श्रृंखला बनाकर ग्लोगल वार्मिंग की चुनौतियों से जूझने के लिए लोगों को प्रेरित करेंगे।

इस मौके पर नीतीश ने 1032 करोड़ रुपए की 841 योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। सीएम ने कहा कि 19 जनवरी को जो मानव श्रृंखला बनेगी, उसमें पर्यावरण संरक्षण के साथ शराबबंदी, दहेज, बाल-विवाह के खिलाफ संकल्प भी लिया जाएगा। नीतीश ने डीजीपी को निर्देश दिया कि हर दिन आधे घंटे का समय निकालकर अभियान की समीक्षा करें। अभियान में जो अधिकारी व कर्मचारी दोषी पाए जाएंगे, उन्हें बर्खास्त किया जाएगा।

सीएम नीतीश ने कहा कि किचनपटिया में 85.12 करोड़ की लागत से इंजिनियरिंग कॉलेज व मझौलिया प्रखंड के महना गनी में 42.44 करोड़ की लागत से पॉलिटेक्निक कॉलेज के भवनों का निर्माण होगा। स्कूलों में अतिरिक्त वर्ग कक्षों के निर्माण मद में 14 करोड़ रूपये खर्च होंगे। ग्रामीण विकास विभाग के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों में 263.74 करोड़ की लागत से सड़कों का निर्माण होगा। बेतिया शहर में अनुसूचित जनजाति के छात्रों के लिए थरूहट विकास अभिकरण के माध्यम से 152 बेड के छात्रावास का निर्माण किया जएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सौर ऊर्जा अक्षय ऊर्जा है। इसे सरकारी भवनों पर शुरू कर रहे हैं। कोयला खत्म होगा, तो बिजली कहां से आयेगी, लिहाजा सौर ऊर्जा पर निर्भरता जरूरी है। उन्होंने कहा कि पीने के पानी के लिए हर घर नल का जल पहुंचाया जायेगा। बाकी अन्य काम कुएं और चापाकल से होगा। उन्होंने कहा कि रेन वाटर हार्वेस्टिंग भी जरूरी है। इससे जलस्तर नीचे नहीं जायेगा।


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