बिहार के इस धाकड़ और कद्दावर नेता के कारण कोका कोला को भारत छोड़ना पड़ा, पढ़िए पूरी खबर

बिहार के इस धाकड़ और कद्दावर नेता के कारण कोका कोला को भारत छोड़ना पड़ा, पढ़िए पूरी खबर

DESK : बिहार विधानसभा का चुनाव हो रहा है. कहा जाता है की यहाँ होने वाला चुनाव पुरे देश की दिशा और दशा तय करता है. राज्य में कई ऐसे नेता हुए जिन्होंने देश के विकास में अहम भूमिका अदा की. इन्हीं नेताओं में एक थे जॉर्ज फर्नांडीस. जिन्हें देश में एक कद्दावर और समाजवादी नेता के रूप में जाना जाता है. 

बात 1977 की है. जब जॉर्ज फर्नांडीस केंद्र सरकार में उद्योग मंत्री के रूप में काबिज थे. इसी दौरान मुजफ्फरपुर के सर्किट हाउस में वे अधिकारीयों के साथ मीटिंग कर रहे थे. मीटिंग के दौरान ही उनके टेबल पर एक ग्लास में काले रंग का एक पेय पदार्थ लाकर रखा गया. ग्लास में रखी चीज को देखकर उन्होंने अधिकारीयों से पूछा की यह क्या है. उन्हें बताया गया की यह कोका कोला है. तुरंत जॉर्ज फर्नांडीस ने इसे संज्ञान में लिया. 

उन्होंने तत्काल फेरा कानून के तहत कार्रवाई करनी शुरू की. फेरा का मतलब है फोरेन एक्सचेंज रेगुलेशन एक्ट. इस कानून में प्रावधान था की किसी बहुराष्ट्रीय की भारत के किसी कंपनी में 40 फीसदी से अधिक हिस्सेदारी नहीं होगी. जॉर्ज फर्नांडीस ने इस कानून के तहत कार्रवाई शुरू की. जिसके बाद आईबीएम और कोका कोका को देश से बाहर जाना पड़ा. 

जॉर्ज फर्नांडीस ने इस कानून के तहत कई कंपनियों पर कार्रवाई की. कोका कोला के बदले भारत में सेवेन सेवेन की शुरुआत की गयी. भारत सरकार की कंपनी ने इसे तैयार किया. बाद में प्रगति मैदान के ट्रेड फेयर में इसे लांच किया गया. बाद में जनता पार्टी की सरकार गिर गयी. जिसके बाद इंदिरा गाँधी सत्ता में आई. इंदिरा गाँधी को कोई ऐसी चीज पसंद नहीं थी. जिससे उन्हें जनता पार्टी के सरकार की याद आये. बाद में कोका कोला के खिलाफ खड़ा हुआ उत्पाद कोका कोला के पास ही चला गया.  


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