आंकड़ों में भी घालमेल .... बिहार में आए दिन होती से शराब से मौत लेकिन नीतीश सरकार का दावा ... 5 साल में सिर्फ 21 लोग मरे

आंकड़ों में भी घालमेल .... बिहार में आए दिन होती से शराब से मौत लेकिन नीतीश सरकार का दावा ... 5 साल में सिर्फ 21 लोग मरे

पटना. बिहार में अप्रैल 2016 से शराबबंदी है लेकिन पिछले वर्षों के दौरान कई ऐसे वाकये हुए जिसमें जहरीली शराब पीकर दर्जनों लोगों की मौत हो गई. ताजा मामला छपरा का है जहाँ पिछले 24 घंटों के दौरान ही जहरीली शराब से करीब 35 लोगों की मौत हो चुकी है. हालांकि जिला प्रशासन अब तक 27 मौतों की बात कर रहा है. लेकिन उससे भी हैरान करने वाली बात है कि बिहार सरकार के आंकड़े कहते हैं कि राज्य में वर्ष 2016 से 2020 के बीच आधिकारिक तौर पर अवैध और नकली शराब से 21 लोगों की मौत हुई. पांच साल में मात्र 21 लोगों की मौत होने का आंकड़ा हैरान करता है लेकिन सरकारी दस्तावेजों की यही हकीकत है. 

ऐसे में सरकारी आंकड़े और जमीनी हकीकत के बीच के अंतर को समझने के लिए ये आंकड़े ही सबकुछ बता देते हैं. यह अगल बात है कि 2016 से 2020 के बीच कई ऐसे वाकये हुए जिसमें शराब से मरने वालों की घटनाओं ने सुर्खियां बटोरी. अकेले अगस्त 2016 में गोपालगंज में 19 लोगों की मौत जहरीली शराब पीने से हुई थी. इसकी पुष्टि कोर्ट में हो गई थी. इस मामले में 5 मार्च 2021 को उत्पाद के स्पेशल कोर्ट ने 13 लोगों को सजा भी सुना दी. पहली बार शराबकांड में 9 को फांसी दी गई, जबकि 4 को उम्रकैद मिली.  

इसी तरह 2017 में वैशाली में शराब पीने से 4 लोगों की मौत हुई. वहीं उसी साल रोहतास में 5 लोगों ने जान गंवाई. 2018 में बेगूसराय में 4 लोगों की शराब ने जान ले ली.  2019 में गया में एक आदमी की मौत की बात शराब से होने को लेकर कही गई जबकि 2020 में नवादा में 2 लोगों ने शराब पीकर जान गंवाया. यानी ये आंकड़े ही बताते हैं कि बिहार में 2016 से 2020 के दौरान 35 लोगों की मौत शराब जनित मामलों में हुई. लेकिन इसके उलट बाकयदा संसद के पटल पर बताया गया कि बिहार में इस 5 साल की अवधि में मात्र 21 लोगों की जान शराब से गई. 


भारत में अवैध रूप से बनाई गई नकली या जहरीली शराब से हर साल हजारों लोगों की मौत होती है. इसी क्रम में इसी साल लोकसभा में 19 जुलाई 2022 को बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के सांसद कुंवर दानिश अली ने अवैध और नकली शराब से हुई मौतों को लेकर सवाल पूछा था. जवाब केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने दिया था. राय के जवाब में कहा गया कि साल 2016 से 2022 के बीच, भारत में 6 हजार 172 लोगों की मौत अवैध और नकली शराब पीने से हुई है. सरकार द्वारा दिए गए आंकड़ों के मुताबिक 2016 में 1054, 2017 में 1510, 2018 में 1365, 2019 में 1296 और 2020 में 947 लोगों की मौत हुई. इस दौरान, सबसे ज्यादा 1214 मौतें मध्य प्रदेश में हुईं, दूसरे नंबर पर कर्नाटक है, जहां 909 लोगों की मौत हुई वहीं तीसरे नंबर पर पंजाब है, जहां 725 लोगों की मौत हुई. पिछले पांच सालों में अवैध और नकली शराब पीने से हरियाणा में 476 लोगों की जान गई. वहीं शराबबंदी वाले गुजरात में इन पांच सालों में अवैध और नकली शराब से 50 लोगों की मौत हुई है जबकि बिहार में 21 लोगों की मौत हुई. 

हालांकि इन आंकड़ों से अलग अगर देखा जाए तो वर्ष 2021 में ही बिहार में जो प्रमुख शराबकांड हुए उसमे 90 लोगों की मौत हुई. इसमें गोपालगंज में 17, पश्चिम चंपारण में 26, मुजफ्फरपुर में 15, वैशाली में 6, सीवान में 6, कैमूर में 2, रोहतास में 1, नवादा में 15 और बेगूसराय में 2 मौतें हुई. वहीं अब 2022 में भी बिहार में शराब से होने वाली कई मौतें हुई. इसमें अगस्त में भी छपरा में ही दर्जनों लोगों की मौत का मामला सामने आया था जबकि एक बार फिर से छपरा में ही करीब 35 लोगों की शराब से मौत हुई है. मार्च के महीने में भी इसी तरह होली के समय राज्य के अलग अलग जिलों में कई लोगों की शराब से मौत होने की बात सामने आई थी.  इसके बाद भी सरकारी आंकड़ों और जमीनी हकीकत में एक बड़ा अंतर देखने को मिलता है. 


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