कांग्रेस को लग सकता है एक और बड़ा झटका, आजाद के बाद अब मनीष तिवारी भी छोड़ सकते हैं राहुल का साथ

कांग्रेस को लग सकता है एक और बड़ा झटका, आजाद के बाद अब मनीष तिवारी भी छोड़ सकते हैं राहुल का साथ

DESK : बीते शुक्रवार कांग्रेस को बड़ा झटका लगा था, जब उनके सबसे पुराने सदस्यों में शामिल गुलाम नबी आजाद ने पार्टी छोड़ने की घोषणा कर दी। कांग्रेस ईकाई के लिए आजाद का जाना बड़ा आघात माना जा रहा था, जिससे अभी उबरने की कोशिश शुरू ही हुई थी, कि शनिवार एक फिर यह सामने आई कि कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने भी तेवर दिखाने शुरू कर दिए। आजाद के इस्तीफे को लेकर जब कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी से प्रतिक्रिया मांगी गई तब उन्होंने कहा कि हमें किसी से सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है। मैंने इस पार्टी को 42 साल दिए हैं। मैं यह पहले भी कह चुका हूं कि हम इस संस्था (कांग्रेस) के किराएदार नहीं हैं, हम सदस्य हैं।

2020 में यह हो जाना चाहिए

तिवारी ने कहा कि अब अगर आप हमें बाहर निकालने की कोशिश करेंगे तो यह दूसरी बात है, और यह देखा जाएगा। ऐसा लगता है कि 1885 से मौजूद भारत और कांग्रेस के बीच समन्वय में दरार आ गई है। आत्मनिरीक्षण की जरूरत थी। मुझे लगता है कि 20 दिसंबर 2020 को सोनिया गांधी के आवास पर हुई बैठक में सहमति बन गई होती तो यह स्थिति नहीं आती। बता दे कि मनीष तिवारी भी उन्हीं नेताओं में से एक हैं जो कांग्रेस पार्टी से लंबे समय से नाराब चल रहे हैं। वह कई बार नेतृत्व पर सवाल उठा चुके हैं।

सोच में आया अंतर

मनीष तिवारी ने आगे कहा कि 2 साल पहले, हम में से 23 ने सोनिया गांधी को लिखा था कि पार्टी की स्थिति चिंताजनक है और इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उस पत्र के बाद कांग्रेस सभी विधानसभा चुनाव हार गई। अगर कांग्रेस और भारत एक जैसे सोचते हैं, तो लगता है कि दोनों में से किसी एक ने अलग सोचना शुरू कर दिया है।

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा कि  जिस व्यक्ति की हैसियत एक वार्ड चुनाव लड़ने की भी नहीं है, जो व्यक्ति कभी कांग्रेस नेताओं का चपरासी हुआ करता था, वह जब पार्टी के बारे में ज्ञान देता है तो हंसी आती है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें किसी से सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है। 


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