झारखण्ड सरकार के खाते से काटे गए 1417 करोड़ रूपये, कांग्रेस पार्टी ने किया विरोध

झारखण्ड सरकार के खाते से काटे गए 1417 करोड़ रूपये, कांग्रेस पार्टी ने किया विरोध

DHANBAD : केंद्र सरकार के निर्देश पर आरबीआई द्वारा डीवीसी के बकाये का एक किस्त 1417 करोड़ रुपए झारखण्ड सरकार के खाते से काट लिये जाने का कांग्रेस ने कड़ा विरोध जताया है. झरिया विधायक पूर्णिमा सिंह ने इसे संघीय ढांचे पर प्रहार करना बताया. उन्होंने कहा की कोयला का निजीकरण क्या संघीय ढांचे के ऊपर प्रहार नही है. संविधान में आर्टिकल 254 के तहत राज्य सरकार को यह अधिकार है कि केंद्र सरकार कोई नियम लागू करती है तो राज्य सरकार उसमे बदलाव कर सकती है. राज्य सरकार को यह अधिकार मिलना चाहिए. 

पूर्णिमा सिंह यहाँ निरीक्षण भवन में प्रेस वार्ता को सम्बोधित कर रही थी. मौके पर रामगढ़ विधायक ममता देवी, जिला अध्यक्ष ब्रजेन्द्र प्रसाद सिंह उपस्थित थे. पूर्णिमा सिंह ने कहा 1948 में जब डीवीसी बना उस वक्त बिहार, पश्चिम बंगाल की सरकार और केंद्र सरकार पार्टनर थी. बिहार से अलग होने के बाद झारखण्ड सरकार पार्टनर बना. इस प्रदेश में डीवीसी के छह प्लांट है. इसके बाद भी डीवीसी मनमानी करता रहा और आज भी कर रहा है. भाजपा के सांसद , विधायक चुप है. विधानसभा भवन बना जिसपर 113 करोड़ का बकाया हेमंत सरकार पर मढ़ दिया गया. कहा गया कि क्लियरेंस नही लिया गया है. विधानसभा भवन एक साल पूर्व भाजपा के कार्यकाल में बना. इसपर भाजपा के लोगो को जवाब देना चाहिए पर वे मौन है. 

उन्होंने कहा की झारखण्ड में 2014 में भाजपा की सरकार बनी. उस वक्त राज्य पर 35 हजार करोड़ का बकाया था. हेमंत सरकार को जब प्रदेश मिला उस वक्त कर्ज का आंकड़ा 90 हजार करोड़ रु पहुँच गया. इस कोरोना काल मे जहाँ केंद्र को राज्य की प्रगति के लिए सहयोग करना चाहिए. वही खाते से केंद्र के निर्देश पर राशि काट ली जाती है. 

उन्होंने कहा की धनबाद में 4 लेन सड़क को 8 लेन करने का मामला हो या सदन भवन के री कंट्रक्शन में 600 करोड़ के बजाय 800 करोड़ का खर्च का प्राकलन तैयार करना हो. इन सबों में भाजपा अपनी मनमानी करते आई है. ममता देवी ने कहा इस वैश्विक महामारी में राज्य को फंड की आवश्यकता है.  पिछली सरकार के कारनामे ऐसे रहे कि सरकार का खजाना खाली हो गया. इसके बावजूद कम संसाधनों के बीच यह सरकार बेहतर कार्य करने का प्रयास कर रही है. डीवीसी को 1417 करोड़ रु दे दिया जाता है. जबकि इस पैसे से स्वास्थ्य उपकरण की खरीदारी में राशि खर्च कर सकती थी. आज केंद्र के पास राज्य सरकार का 74 हजार करोड़ रु बकाया है. 

धनबाद से अजय उपाध्याय की रिपोर्ट 


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