कटिहार के किसानों की चांदी, कांट्रेक्ट फार्मिंग के तहत खेत से ही बेच देते हैं बड़ी कंपनी को आलू, कमा रहे जबरदस्त मुनाफा

कटिहार के किसानों की चांदी, कांट्रेक्ट फार्मिंग के तहत खेत से ही बेच देते हैं बड़ी कंपनी को आलू, कमा रहे जबरदस्त मुनाफा

कटिहार। एक तरफ कांट्रेक्ट फार्मिंग के विरोध में किसान दो माह से आंदोलन कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ बिहार के कटिहार जिले के कुछ किसान ऐसे हैं, जिनके लिए कांन्ट्रेक्ट फार्मिंग करना बेहद मुनाफा का सौदा साबित हुआ है। बड़ी  कंपनियां सीधे उनके खेत से ही फसल की खरीदी कर उन्हें एकमुश्त राशि प्रदान कर रही हैं। 

बताते चलें कटिहार के दलन और रौतारा में सौ एकड़ से अधिक इलाके में तीन दर्जन से अधिक किसान पिछले कई वर्षों से आलू की कॉन्ट्रैक्ट खेती से जुड़े हुए हैं, इन लोगों के माने तो किसानों के लिए यह फायदेमंद और बेहतर विकल्प,इस मे कम जोखिम में निश्चित लाभ है। उनका कहना है कि बाजार में आलू का दाम चाहे जो भी हो, हमें सही कीमत मिल जाती है और बेचने के लिए मंडियों का चक्कर भी नहीं लगाना पड़ता है।

पेप्सिको जैसी कंपनी करती है खरीदारी

कटिहार के यह किसान पिछले कई वर्षों से कांट्रैक्ट फार्मिंग से जुड़े हुए हैं। इन किसानों ने कांट्रेक्ट फार्मिंग को लेकर लोगों ने इस भ्रम जाल को दूर करते हुए अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि इससे उन्हें बेहद मुनाफा हो रहा है।  कॉन्ट्रैक्ट खेती के अन्य पहलू पर जानकारी देते हुए किसानों ने बताया कि कोलकाता के  चिप्स बनानेवाली पेप्सिको जैसी बड़ी कंपनी के साथ वे लोग पिछले कई वर्षों से काम कर रहे हैं और इसमें निश्चित आय हैं। उन लोगों ने अन्य लोगों से भी अपील करते हुए बेझिझक कांट्रेक्ट खेती से जुड़ने की सलाह दिया।


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