CORONA IN BIHAR: भयावहता बरकरार, दो महीने में इस गांव के 125 लोगों की हुई मौत, स्वास्थ्य विभाग को खबर ही नहीं

CORONA IN BIHAR: भयावहता बरकरार, दो महीने में इस गांव के 125 लोगों की हुई मौत, स्वास्थ्य विभाग को खबर ही नहीं

BHOJPUR: एक तरफ बिहार में कोरोना के मामले में लगातार गिरावट देखी जा रही है, वहीं के कुछ सुदूरवर्ती गांव ऐसे हैं, जहां कोरोना का कहर बरकरार है. यहां चौंकाने वाली बात यह है कि इन गांव में हो रही मौतों का कोई जिक्र जिला स्वास्थ्य विभाग या राज्य स्वास्थ्य विभाग के पास नहीं है. यह मौतें कोरोना से हो रही है या किसी अन्य बीमारी से इसका भी पता नहीं लगाया जा सकता है, क्योंकि गांव में एक भी स्वास्थ्य केंद्र या कोरोना जांच केंद्र नहीं है. ऐसी स्थिति में आप हालात का अंदाजा बखूबी लगा सकते हैं.

भोजपुर जिले के कोईलवर प्रखंड के कुल्हड़िया गांव में कोरोना का कहर ऐसा टूटा कि मौत के बाद मोक्ष के लिए पितरों को इंतजार करना पड़ गया. कोरोना का रूप भी इतना भयानक है कि गांव में सिर्फ दो दिन में 18 लोगों की मौत हो गई. ग्रामीणों का कहना है कि इसी गांव में पिछले दो महीने में 125 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है. हालांकि, इन मौतों का जिक्र सरकारी रिकार्ड में नहीं है. कुल्हड़ियां गांव के विनोद कुमार सिंह बताते हैं कि परिवार में अभी तक 4 लोगों की मौत हुई है. घर के पहले सदस्य की मौत 28 अप्रैल को हुई. अभी पहले व्यक्ति के कर्मकांड में लगे ही थे कि 2 मई को 78 वर्षीय बुजुर्ग की मौत हो गई. इसके बाद मौत का सिलसिला जारी रहा और घर में 4 लोगों की मौत हो गई. इस संबंध में गांव के रामनाथ ने बताया कि 16 अप्रैल को कोइलवर PHC में कोरोना उनके पिता ने कोरोना जांच करवाई थी. पिता जी की मौत 17 अप्रैल को हो गई. बड़े पापा की भी मौत उसी अंतराल में हो गई. दो लोगों की मौत के बाद हॉस्पिटल से फोन कर बताया कि दोनों को कोरोना नहीं था. सबसे बड़ी बात तो यह थी कि हम दोनों का नाम भी रजिस्टर से गायब था.


यहां की स्वास्थ्य व्यवस्था इतनी लचर है कि गांव में दो महीने पहले जांच हुई थी, लेकिन उसके बाद कोई टीम जांच के लिए गांव नहीं आई. गांव में पिछले दो 125 से ज्यादा मौतों की जानकारी कोइलवर प्रखंड के चिकित्सा प्रभारी डॉ. नवीन कुमार को है ही नहीं. उनका कहना है कि अब गांव में सर्वे कराया जाएगा. जांच रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ भी कहा जा सकता है. यहां सोचने वाली बात यह है कि स्वास्थ्य विभाग की नींद इतने लोगों की मौत के बाद टूटी है या फिर उन्हें यह सब पहले से पता था और आंकड़ो में हेरफेर के लिए यह सब हो रहा है?

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