CORONA IN BIHAR: गांवों में नहीं है कोरोना का डर, नहीं जानते हैं प्रोटोकॉल, हेल्थ टीम कर रही खानापूर्ति, ऐसे में कैसे घटेगा संक्रमण?

CORONA IN BIHAR: गांवों में नहीं है कोरोना का डर, नहीं जानते हैं प्रोटोकॉल, हेल्थ टीम कर रही खानापूर्ति, ऐसे में कैसे घटेगा संक्रमण?

DESK: राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर जारी किए जाने वाले कोरोना के आंकड़े यह साफ बताते हैं कि शहरों में संक्रमण घट रहा है. लोग इस बात से खुश भी हैं और इस पर सरकार को बधाई का पात्र बना रहे हैं. इसी बीच कोरोना से गांव की क्या स्थिति है इस पर कोई जल्दी बात नहीं करता. कोरोना की दूसरी लहर में सबसे ज्यादा प्रभावित दूर-दराज के गांव हुए हैं. कई गांव तो ऐसे हैं जहां के लोग अब तक कोरोना को नहीं जानते. इन गांव में हेल्थ टीम भी नियमित रूप से दौरा नहीं करती जिस वजह से यहां के लोग बाकी दुनिया से कटे से रहते हैं और इलाज के नाम पर घरेलू नुस्खे और झोलाछाप डॉक्टरों के भरोसे हैं. हालांकि इन गांव में कोरोना की वजह से लोगों की मौत हो रही है फिर भी अब तक यहां कोई प्रशासनिक पहल नहीं की गई. इस वजह से यह संक्रमण कितनी तेजी से बढ़ रहा है इसका अंदाजा आप खुद ही लगा सकते हैं.

बिहार के गिद्दौर की कोल्हुआ पंचायत का गांव है धोबघट. यहां 13 मई को आई रिपोर्ट में 46 लोग कोरोना संक्रमित बताए गए. वहीं बीते 7 दिनों में 2 लोगों की मौत भी हुई है. लोगों ने बताया कि यहां 6 अप्रैल को एक युवक भोपाल से आया था. गांव आने के बाद उसे सर्दी खांसी हुई और जांच में वह युवक कोरोना पॉजिटिव निकला. इसके पहले ही वह पूरे गांव के साथ घूम चुका था. उसके बाद से गांव के हालात बिगड़े हुए हैं. इसी बीच इसी गांव में 8 से 14 अप्रैल को श्रीमद्भागवत कथा का पाठ हुआ था. इसमें बाहर से आए कथावाचक ही कोरोना संक्रमित निकले. इसके बाद गांव में कोरोना का प्रकोप ऐसा हुआ कि एक दिन में 46 लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई. इतना सब होने के बाद भी गांव में सभी कार्यक्रम पूर्व नियोजित तरीके से किए जा रहे हैं. गांव में शादियां हो रही है, श्राद्ध हो रहे हैं और सब कुछ उसी तरीके से हो रहा है जैसा कि उसे होना चाहिए. यहां किसी भी कोरोना गाइडलाइंस का पालन नहीं किया जा रहा है.

दूसरी तरफ भाजपा सांसद छेदी पासवान के आदर्श गांव मल्हीपुर की स्थिति भी कुछ खास अच्छी नहीं है. इस गांव में करीब साढ़े सात हजार लोग रहते हैं. यहां एक बार भी कोरोना की जांच नहीं की गई है. इसी गांव में अब तक 20 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. जान गंवाने वाले ज्यादातर बुजुर्ग लोग थे. यहां भी लोगों में जागरूकता की कमी है

बेतिया से 95 किलोमीटर दूर बगहा का नौरंगिया पंचायत भी स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित है. यहां के लोग बीमारियों से उभरने के लिए घरेलू नुस्खे या फिर भगवान पर निर्भर हैं. आज भी लोगों को खांसी जुकाम होता है तो वह मानते हैं कि उन्हें टाइफाइड हुआ है. डरावनी बात यह है कि यहां बीते 13 दिनों में 12 लोगों की मौत हो चुकी है. गांव में दवा दुकान चलाने वाले व्यक्ति बताते हैं कि उनके यहां सिर्फ सर्दी जुकाम और बुखार की दवा ही बिक रही है. यहां के लोगों को कोरोना की बिल्कुल भी जानकारी नहीं है और ना ही इस तरफ से प्रशासन ने किस कभी कोई पहल की.


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