कोरोना की वजह से बिहारी छात्रों की गैरहाजिरी ने कोचिंग हब कोटा का भठ्ठा बैठा दिया, 2 हजार करोड़ के कारोबार पूरी तरह बर्बाद

कोरोना की वजह से बिहारी छात्रों की गैरहाजिरी ने कोचिंग हब कोटा का भठ्ठा बैठा दिया, 2 हजार करोड़ के कारोबार पूरी तरह बर्बाद

Desk: कोरोना संकट की वजह से छात्रावासों से छात्रों की गैर हाजिरी ने कोचिंग की राजधानी कहे जाने वाले कोटा का भट्ठा बैठा दिया है.  कोरोना की मार से कोचिंग हब कोटा की इकोनॉमी तार-तार हो गई है. कोटा के 3 हजार छात्रावास ऊपर एक एक करोड़ का लोन है अब छात्र नहीं है तो किस्त का भी संकट खड़ा हो गया है.

बिहार और उत्तर प्रदेश के छात्रों के भरोसे चलने वाला कोचिंग हब कोटा की अर्थव्यवस्था  पूरी तरह से बैठ गई है. यहां करीब करीब 3 हजार छात्रावासों का दो हजार करोड़ का कारोबार था. खासकर बिहार और उत्तर प्रदेश से आने वाले छात्र इन्हीं छात्रावासों में रहकर कोचिंग किया करते थे. लेकिन वैश्विक महामारी कोरोना की वजह से सभी संस्थानों को बंद कर दिया गया. परिणाम यह हुआ की कोचिंग कर रहे छात्र घर वापस लौट गए तीन हजार छात्रावास अचानक खाली हो गए आज की तारीख में सभी छात्रावासों पर एक एक करोड़ रुपए का लोन है. अब बड़ा सवाल है कि छात्रावास में छात्र ही नहीं हैं तो पैसा आएगा कहां से. अब छात्रावासों के लिए बैंक का लोन चुकाना भी मुश्किल हो रहा है.

छात्रों के रहने से कोटा में होता 12 सौ करोड़ का कारोबार
कोरोना ने न सिर्फ छात्रावासों की माली हालत खराब कर दी, बल्कि पूरे कोटा की अर्थव्यवस्था मानो ठप हो गई. कोटा हॉस्टल एसोसिएशन के अध्यक्ष नवीन मित्तल के अनुसार कोटा में करीब तीन हजार छात्रावास हैं. जिनमें लगभग सवा लाख कमरे हैं. कोचिंग एरिया में सन्नाटा पसर जाने के बाद से मेस और स्टेशनरी जैसे व्यापार के ऊपर काफी गहरा असर हुआ है. नवीन मित्तल के अनुसार कोटा में छात्रावासों के रहने से करीब 12 सौ करोड रुपए का शानदार कारोबार होता था. होस्टल संचालकों का कहना है कि सभी छात्रावासों पर औसतन एक 1 करोड रुपए का कर्ज है. सभी छात्रावासों को प्रत्येक माह 1 लाख तक के ईएमआई देनी पड़ती है. ऐसे में छात्र नहीं रहेंगे तो छात्रावासों का ईएमआई कैसे भरा जाएगा.

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