कश्मीर में कुछ बड़ा होने वाला है... सुरक्षाबलों की बैठक, चार महीने के लिए राशन-पानी जमा करने का निर्देश

कश्मीर में कुछ बड़ा होने वाला है... सुरक्षाबलों की बैठक, चार महीने के लिए राशन-पानी जमा करने का निर्देश

कश्मीर में अचानक हलचल तेज हो चली है। भारत सरकार का यू 10 हजार सैनिको का कश्मीर घाटी में भेजना कोई बड़ा संदेश देता है।बताया जा रहा है कि जम्मू कश्मीर में कुछ बड़ा होने वाला है। कश्मीर के बडगाम में रविवार को सुरक्षाबलों की एक बड़ी बैठक हुई। बताया जा रहा है कि जम्मू कश्मीर के हालात के लेकर बैठक में चर्चा की गई। बताया जा रहा है बैठक में चार महीने के लिए राशन-पानी जमा करने का निर्देश दिया गया है।

बताया जा रहा है कि जम्मू एवं कश्मीर में लागू विवादास्पद अनुच्छेद-35ए को हटाने की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। सूत्रों के मुताबिक मोदी सरकार ने इस संबंध में फैसला ले लिया है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की घाटी की यात्रा से लौटने के दो दिन बाद केंद्र ने राज्य में 10 हजार अतिरिक्त अर्धसैनिक बलों के जवानों को तैनात करने का फैसला किया है। सूत्रों के मुताबिक इसके लिए कोई कसर छोड़ी नहीं जा रही है। आदेश से यह साफ नजर आ रहा है। 35 ए के विरोध को लेकर हिंसा या राज्य की शांति भंग करने के प्रयास हो सकते हैं, इसे कंट्रोल करने की पूरी कोशिश की जाएगी। ताकि आम नागरिकों को कम से कम असुविधा हो।

बता दें कि लोकसभा 2019 चुनाव के घोषणापत्र में भी बीजेपी ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 35 ए और 370 को खत्म करने की प्रतिबद्धता जाहिर की थी। भारतीय जनता पार्टी का तर्क है कि ये अनुच्छेद राज्य के एकीकरण में बाधा बनने के अलावा जम्मू-कश्मीर के विकास में भी रुकावट बने हुए हैं। मोदी सरकार के इस कदम से लग रहा है उसने इस दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। पिछले तीन दिनों में घाटी में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलोंकी अतिरिक्त कंपनियों का आना शुरू भी हो गया है।सीएपीएफ को ले जाने वाले स्पेशल प्लेन तीन दिनों में श्रीनगर हवाई अड्डे पर उतरे हैं। जबकि अतिरिक्त कंपनियों को ले जाने वाले काफिले जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे के जरिए राज्य में पहुंच रहे हैं।

सूत्रों के मुताबिक अनुच्छेद 35 ए को हटाए जाने के बाद कानून-व्यवस्था के मुद्दे से निपटने के लिए ऑपरेशन को नाम भी दे दिया गया है। सूत्रों का कहना है कि जो असामाजिक तत्व सार्वजनिक तौर पर माहौल खराब कर सकते हैं, उनकी लिस्ट बनाई जा चुकी है। ऐसे राष्ट्रविरोधी तत्वों को हिरासत में लिया जाएगा, ताकि राज्य में शांति रहे। दिलचस्प बात है कि असामाजिक तत्वों की लिस्ट में सिर्फ अलगाववादी ही नहीं बल्कि स्थानीय राजनेता भी हैं। उन्हें भी रडार पर रखा गया है, जिससे वह मौके का राजनीतिक फायदा न उठा पाएं।


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