करारी हार से हताश राहुल अपने इस्तीफे पर अड़े, गहरे संकट में कांग्रेस

करारी हार से हताश राहुल अपने इस्तीफे पर अड़े, गहरे संकट में कांग्रेस

NEWS4NATION DESK : देश की सबसे पुरानी और सशक्त पार्टी कांग्रेस वर्तमान समय में अपने सबसे गहरे संकट के दौर से गुजर रही है। यह पहला मौका है जब कांग्रेस की किसी चुनाव में इतनी बड़ी दुर्गत हुई है। करारी हार से निराश और हताश पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी अपने इस्तीफे पर अड़े है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पार्टी के आलाकमान सोनिया गांधी और वरिष्ठ नेताओं द्वारा अध्यक्ष पद से त्याग-पत्र नहीं देने की बात को राहुल दरकिनार करते हुए पद छोड़ने की बात पर अड़े हुए है। 

बता दें कि शनिवार को हुई कांग्रेस की वर्किंग कमिटी की मीटिंग में राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपने पद से इस्तीफे की पेशकश की थी। हालांकि कांग्रेस की शीर्ष निर्णायक संस्था के सदस्यों ने एकमत से उनके प्रस्ताव को खारिज कर दिया था। इस मीटिंग के दौरान राहुल गांधी ने पी. चिदंबरम, अशोक गहलोत और कमलनाथ जैसे सीनियर नेताओं पर पार्टी से ज्यादा बेटों को तवज्जो देने का भी आरोप लगाया था। कांग्रेस वर्किंग कमिटी की मीटिंग में सीनियर नेताओं के अलावा सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी भी मौजूद थीं।

इधर पार्टी की करारी शिकस्त के बाद से अब तक कुल 13 इस्तीफे हो चुके हैं। इनमें पंजाब के प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़, झारखंड के अजय कुमार और असम के प्रदेश अध्यक्ष निपुन बोरा का भी इस्तीफा शामिल हैं। 

इतना ही नहीं जिन राज्यों में कांग्रेस की सरकार है वहां भी इनकी स्थिति गड़बड़ होती नजर आ रही है। कर्नाटक और राजस्थान में उसकी सरकारें डगमगाती दिख ही हैं।

पार्टी में आंतरिक संघर्ष के साथ ही कर्नाटक और राजस्थान में उसकी सरकारें भी दांव पर लगी हैं। इन दोनों ही राज्यों से बीजेपी के ऐक्टिव होने की खबरें हैं। कहा जा रहा है कि कर्नाटक में कांग्रेस विधायकों रमेश जरकिहोली और डॉ. सुधाकर ने बीजेपी नेता एस.एम कृष्णा से हाल ही में मुलाकात की थी। इस दौरान बीजेपी के अन्य नेता भी मौजूद थे। सूत्रों के मुताबिक ऐसे विधायकों की बड़ी संख्या है, जो लोकसभा चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन से नाखुश हैं।

वहीं दूसरी ओर राजस्थान में भी आतंरिक लड़ाई तेज है और ऐसे कई मंत्री हैं, जिनका कहना है कि इस करारी हार के लिए जवाबदेही तय की जानी चाहिए। कर्नाटक में कांग्रेस का खाता भी नहीं खुल सका है। बीजेपी ने प्रदेश की सभी 25 सीटों पर जीत हासिल की है। यही नहीं पिछले साल मई में ही कर्नाटक में जेडीएस संग सराकर बनाने वाली कांग्रेस को सूबे की 28 में से महज एक सीट पर ही जीत मिली है।

बता दें कि 542 सीटों पर हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को महज 52 सीटें ही मिली हैं। 2014 के आम चुनावों के बाद यह लगातार दूसरा मौका है, जब कांग्रेस पार्टी की सीटें दोहरे अंकों पर ही सिमट गई हैं। यही नहीं लगातार दूसरी बार वह नेता विपक्ष का पद हासिल करने लायक सीटें भी नहीं ला पाई है। 2014 में कांग्रेस को 44 सीटें ही मिली थीं। कांग्रेस का 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में खाता भी नहीं खुला।

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