DGP का आदेश बेअसर : आपराधिक मामलों को निपटारे में मुजफ्फरपुर सबसे सुस्त,पटना भी कुछ कम नहीं

DGP का आदेश बेअसर : आपराधिक मामलों को निपटारे में मुजफ्फरपुर सबसे सुस्त,पटना भी कुछ कम नहीं

NEWS4NATION DESK : नए डीजीपी साहब के आने के बाद पुलिसिंग को दुरुस्त करने के लिए कई मोर्चों पर काम किया जा रहा था। डीजीपी स्वयं हर जिला स्थानों में जाकर पुलिस अधिकारियों को जागरूक कर रहे थे। साथ ही बेहतर पुलिसिंग का तरीका भी बता रहे थे।

इतना ही नहीं इस मसले पर सबसे ज्यादा जोर था कि लंबित आपराधिक मामलों का जल्द से जल्द निपटारा किया जाए,लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात ही आ रहा है।

कई जिले आपराधिक मामलों के निपटारे में चुस्त दिख रहे हैं तो वहीं कई जिले काफी सुस्त दिख रहे हैं। इसका सबसे ज्यादा असर देखने को मिल रहा है वह मुजफ्फरपुर, वैशाली और पटना जैसे जिलों पर है।

मुजफ्फरपुर जिला लंबित आपराधिक मामलों में के निपटारे में बिल्कुल फेल है। इस जिले में पुलिस की सुस्ती का आलम यह है की दर्ज होने वाले मामलों की तुलना में लंबित कांडों की संख्या 14 से ज्यादा है। वही वैशाली में 9 गुना पटना में 8 गुना ज्यादा है। 

गौरतलब है कि बिहार में औसतन हर महीने 24000 केस दर्ज किए जाते हैं। वही जुलाई तक लंबित कांडों की संख्या 152000 के आसपास थी।  

डीजीपी ने कहा था की पुलिस अधिकारी जिन थानों में लंबित आपराधिक मामलों की फेहरिस्त लंबा है वहां जाकर देखें और जल्द से जल्द निपटारे का उपाय समझाएं। फिलहाल लंबित आपराधिक मामलों में सबसे लचर हालत मुजफ्फरपुर का है।

बता दें कि मुजफ्फरपुर जिले में महीने में औसतन 1230 दर्ज होते हैं वही केस दर्ज होने के मुकाबले लंबित कांडों की संख्या 17000 है यानी दर्ज मामलों के मुकाबले 14 गुना ज्यादा केशु का अनुसंधान लंबित पड़ा है। 

इसी तरह वैशाली में भी लंबित केसों की संख्या 6567 100 के बीच है। यहां करीब दर्ज मामलों के 9 गुना अधिक है। इसी तरह पटना में जहां 1 महीने में औसतन तीन हजार के करीब केस दर्ज होते हैं, तो लंबित मामलों की संख्या 24 हजार के करीब है। 

वहीं जमुई सारण रोहतास गोपालगंज का भी रिकॉर्ड खराब है। दूसरी तरफ मुंगेर औरंगाबाद मधेपुरा मधुबनी सहरसा किशनगंज आदि जगहों पर लंबित मामलों के निपटारे को लेकर ठीक-ठाक काम किया जा रहा है। 
 
 

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