धनकुबेर 'इंजीनियर' को 'सुशासन' ने 3 महीने तक बचाये रखा! अब नीतीश मिश्रा के नेतृत्व में विस की जांच कमिटी...

धनकुबेर 'इंजीनियर' को 'सुशासन' ने 3 महीने तक बचाये रखा! अब नीतीश मिश्रा के नेतृत्व में विस की जांच कमिटी...

पटना. ग्रामीण कार्य विभाग के भ्रष्ट अभियंता को बचाने का आरोप विधानसभा में उठने के बाद सरकार की भारी फजीहत हुई थी। विभागीय मंत्री जयंत राज की सत्ता पक्ष और विपक्षी सदस्यों ने बोलती बंद कर दिया था। भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति रखने वाली नीतीश सरकार की उस दिन सदन में भारी किरकिरी हुई थी। लाखों रुपए के साथ गिरफ्त में आए अधीक्षण अभियंता पर 3 महीने बाद भी कोई कार्रवाई नहीं होने पर सुशासन कटघरे में खड़ा हो गया था।

भ्रष्ट अधिकारी को बचाने का आरोप लगने के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने सदन में जांच के लिए कमेटी गठित करने का आदेश दिया था। अब वह कमेटी गठित कर दी गई है। पूर्व मंत्री व वरिष्ठ विधायक नीतीश मिश्रा की अध्यक्षता में विधायकों की कमेटी गठित की गई है। कमेटी 3 महीने में अपनी जांच रिपोर्ट स्पीकर विजय सिन्हा को सौंपेगी। कमेटी में पूर्व मंत्री नीतीश मिश्रा के अलावे कांग्रेस के विजय शंकर दुबे, राजद से अवध बिहारी चौधरी, बीजेपी के संजय सरावगी और जदयू के राजकुमार सिंह को रखा गया है।

बता दें कि विधानसभा के शीतकालीन सत्र में दरभंगा से भाजपा विधायक संजय सरावगी ने सदन में ग्रामीण कार्य विभाग दरभंगा के प्रभारी अधीक्षण अभियंता जो 67 लाख के साथ पकड़ा गया था उसे बचाने का आरोप लगाया था। भाजपा विधायक ने कहा था कि इतने दिनों बाद भी इस अभियंता के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। अभी तक उसे निलंबित भी नहीं किया गया।

अगस्त 2021 में ही मुजफ्फरपुर में पुलिस वाहन जांच में दरभंगा के प्रभारी अधीक्षण अभियंता अनिल कुमार लाखों रुपए के साथ पकड़ा गया था। आवास पर छापेमारी में ₹4900000 कैश बरामद किया गया था। पुलिस ने उस अभियंता को थाने से ही जमानत दे दी। अगस्त महीने से दिसंबर आ गया, लेकिन उस पर निलंबन की कार्रवाई नहीं हुई। सदन में मामला उठने के बाद 2 दिसंबर को उसे निलंबित किया गया गया है।

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