पारस एचएमआरआई में हृदय रोग की जटिल ओपन हार्ट सर्जरी

पारस एचएमआरआई में हृदय रोग की जटिल ओपन हार्ट सर्जरी

PATNA : हृदय में छेद और आयोटिक वल्व की खराबी से दो साल से सांस फूलने और दिल की धड़कन के तेज चलने की वजह से पूर्णरूप से सो नहीं पा रही महिला को पारस एचएमआरआई सुपर स्पेशिलिटी हॉस्पिटल, राजा बाजार, पटना में ओपन हार्ट सर्जरी कर राहत दिलाई गई. पटना में कई जगह उसने इलाज कराया. लेकिन कोई भी उसका ऑपरेशन करने को तैयार नहीं था. तब वह दिल्ली एम्स गई जहां उसे ऑपरेशन के लिए 2023 की तिथि दी गयी. इस बीच नींद नहीं आने से परेशान महिला को लेकर उसके परिजन पारस एचएमआरआई हॉस्पिटल आये. जहां हृदय रेग के सर्जन डॉ. सुधीर बी.वी उसका ऑपरेशन कर राहत दिलायी. यह एक जटिल ऑपरेशन था, जो सभी अस्पतालों में संभव नहीं है.

इस मामले की जानकारी देते हुए डॉ. सुधीर बी.वी ने बताया कि 41 वर्षीय महिला रप्चर्ड साईनस ऑफ वॉल्सल्वा एनारिज्म की बीमारी से ग्रसित थी. उसके हृदय में बड़ा हुआ छेद था. छेद का इलाज नहीं हो पाने के कारण उसका आयोटिक वल्व भी खराब हो गया. आयोटिक वल्व असाधारण मामलों में ही खराब होता है. छेद और वल्व की खराबी के कारण हृदय से खून की पम्पिंग बाहर नहीं जाकर पुनः हृदय और फेफड़े में लौट आती थी. जिसके कारण उसकी सांस फूल जाती थी और धड़कन तेज हो जाती थी. उन्होंने कहा कि तब उन्होंने तीन घंटे तक ओपन हार्ट सर्जरी कर उसका छेद बंद किया और वल्व की मरम्मत कर दी. ऑपरेशन के दूसरे दिन से ही उसकी हालत सामान्य हो गयी और उसने खाना-पीना शुरू कर दिया. उसे करीब एक सप्ताह हॉस्पिटल में रहना पड़ा. अगर उसका ऑपरेशन नहीं किया जाता तो वह हार्ट फेल्यर की ओर बढ़ रही थी, जो प्राणघातक हो सकता था.

डॉ. सुधीर बी.वी ने बताया कि मरम्मत किये गये आयोटिक वल्व की लाइफ नॉर्मल वल्व की तरह होती है. अगर उसका वल्व बदला जाता तो उसे जीवनभर खून पतला होने की दवा खानी पड़ती, इसलिए हमने वल्व की मरम्मत कर दी. रप्चर्ड साईनस ऑफ वॉल्सल्वा एनारिज्म  की बीमारी 0.19 प्रतिषत लोगों में हीं पाई जाती है. बाकी जगहों की तुलना में एशिया में ज्यादा पाया जाता है. 

इस ऑपरेशन में कार्डियक सर्जरी टीम से डाक्टर सुधीर बी.वी के अलावा डाक्टर अतुल मोहन (कार्डियक एनेस्थेसिस्ट), डाक्टर शुवंकर (कार्डियक एनेस्थेसिस्ट) और फ्यूजनिस्ट दिलिप रणवीर ने अहम भूमिका निभाई. वहीं कार्डियोलॉजी टीम से डॉ. निशांत त्रिपाठी (एचओडी एवं सीनियर कंसलटेंट), डॉ. प्रमोद कुमार ओझा, डॉ. अशोक कुमार, डॉ. अमित जायसवाल और फिजियोथेरेपी से डाक्टर शर्मा का भी अहम योगदान रहा. चुकी महिला काफी गरीब परिवार से थी. इसलिए पारस अस्पताल की मदद से मुख्यमंत्री राहत कोश के जरिये महिला का ऑपरेशन मुख्यमंत्री सहायता कोष की राशि के द्वारा किया गया.

हॉस्पिटल के रिजनल डायरेक्टर डॉ. तलत हलीम ने बताया कि हमारे हॉस्पिटल का कैथलैब काफी एडवांस है और किसी भी ऑपरेशन के लिए यहां सारी सुविधाएं और उपकरण मौजूद है. इसलिए हमारे यहां जटिल से जटिल हृदय रोग की सर्जरी की जाती है.


Find Us on Facebook

Trending News