यूरिया की कालाबाजारी रोकने के लिए डीएम ने की बैठक, यहां विधायक बोलीं - हालात पिछले साल की तरह ही खराब

यूरिया की कालाबाजारी रोकने के लिए डीएम ने की बैठक, यहां विधायक बोलीं - हालात पिछले साल की तरह ही खराब

NAWADA : बिस्कोमान में खाद लेने को लेकर किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है एक दूसरे को ढकेल कर एक काउंटर पर लोगों को लंबी लाइन लगाकर भी लगाकर खाद खरीदना पड़ रहा है। सुरेश महतो,रामविलास महतो,कंचन महतो आदि किसानों ने कहा कि हम किसानों को काफी परेशानी का सामना खाद खरीदने में होता है। एक ही काउंटर से खाद लेने में किसान की लंबी लाइन लगी रहती जिसके कारण लोगों को परेशानी होता है। अगर ऐसा ही रहा तो किसान एक दूसरे से ही काउंटर से टोकन कटाने को लेकर बवाल खड़ा करते हैं। 

वहीं जिलाधिकारी उदिता सिंह ने शनिवार को समाहरणालय स्थित कार्यालय कक्ष में जिला स्तरीय उर्वरक निगरानी समिति की बैठक की। उन्होंने ने जिला कृषि पदाधिकारी को सख्त निर्देश दिया कि उर्वरक वितरण में किसी प्रकार की कालाबाजारी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। वितरण में अनियमितता नहीं हो, इसके लिए उर्वरक वितरण के समय कृषि कर्मियों को दिन भर प्रतिनियुक्त करना सुनिश्चित करें। विभागीय निर्देश के आलोक में किसानों को निर्धारित दर पर उर्वरक उपलब्ध कराएं। इस दौरान जिला कृषि पदाधिकारी संतोष कुमार सुमन ने वित्तीय वर्ष 2022-23 के लिए जिले में खरीफ आदि फसलों के लिए उर्वरक की उपलब्धता एवं खपत के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यूरिया का लक्ष्य 16 हजार एमटी और उपलब्धता 5562 एमटी है। डीएपी का लक्ष्य 3000 व उपलब्धता 2258 एमटी है। एमओपी उर्वरक 3000 एमटी लक्ष्य के विरुद्ध चार मीट्रिक टन,एसएसपी एक हजार मीट्रिक टन के विरुद्ध 843 मीट्रिक टन उपलब्ध है।

अभी जिले में किसी प्रकार की उर्वरक की कोई कमी नहीं है।अभी जिले में तीन हजार से अधिक मीट्रिक टन यूरिया उपलब्ध हैऔर चार दिनों के अंदर 2800 मीट्रिक टन यूरिया मिल जाएगी। बैठक में निर्देश दिया गया कि निर्देश दिया गया कि जिले में यूरिया, उर्वरक खपत के अनुसार ससमय उपलब्ध कराना सुनिश्चित करेंगे।  गत दिसंबर से इसकी जांच नहीं कराई गई है।

वहीं बिस्कोमान में खाद लेने के लिए लग रही किसानों की भीड़ की देखते कांग्रेस हिसुआ विधायक नीतू कुमारी ने कहा कि पिछले वित्तीय वर्ष में उर्वरक की कालाबाजारी बड़े पैमाने पर हुई थी।जिसमें कुछ दुकानों का लाइसेंस रद कर दिया गया था,लेकिन पुनः एक माह के बाद उसे बहाल कर दिया गया। इस साल भी वैसी ही स्थिति बनती हुई नजर आ रही है। उर्वरकों की कालाबाजारी रोकने के लिए प्रशासन को ठोस कदम उठाने की जरुरत है। ताकि किसानों को यूरिया के दलालों पर बचाया जा सके।

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