जन समस्याओं को नजरअंदाज करने वाले अंचलाधिकारी पर डीएम ने कसा शिकंजा, तीन दिन वेतन कटौती की सजा

जन समस्याओं को नजरअंदाज करने वाले अंचलाधिकारी पर डीएम ने कसा शिकंजा, तीन दिन वेतन कटौती की सजा

गया। जनता की समस्याओं को नजरंदाज करने वाले गया जिले के एक अंचलाधिकारी नप गए हैं. गया के जिलाधिकारी ने इसमें त्वरित संज्ञान लेते हुए अंचलाधिकारी को सजा भी सुनी दी. दरअसल गया के जिलाधिकारी डॉ त्यागराजन एसएम जिले के फरियादियों को सुनने के लिए शुक्रवार को जनता दरबार में शामिल हुए थे. इस दौरान जिले के अलग अलग हिस्सों से आए करीब 450 लोगों की समस्याओं को उन्होंने सुना. आवेदनों पर यथाशीघ्र कार्रवाई कराने का भी आवेदकों को आश्वासन दिया. 

डीएम के जनता दरबार में विभिन्न विभागों से संबंधित अधिकारी भी मौजूद रहते हैं. इस दौरान गया नगर अंचल के कई मामले आए जो ने भूमि विवाद, आपसी बंटवारा, अतिक्रमण, जमीन संबंधी मामलों से थे. हालांकि इन मामलों की सुनवाई और निष्पादन को लेकर त्यागराजन ने जब नगर अंचल के अंचलाधिकारी को ढूंढा तो वे जनता दरबार से गायब थे. वहीं बड़ी संख्या में नगर अंचल से जुड़े मामले भी लंबित पाए गए. 

जिलाधिकारी ने जनता जनता दरबार से लगातार अनुपस्थित रह रहे अंचलाधिकारी नगर को बिना अनुमति के अनुपस्थित रहने पर त्वरित कार्रवाई भी की. उन्होंने अंचलाधिकारी का तीन दिनों का वेतन कटौती करने का निर्देश दिया है. साथ ही अपर समाहर्ता को सख्त निर्देश दिया कि अंचलाधिकारी नगर को जनता दरबार में अभिरुचि लेते हुए आवेदकों की समस्याओं का जांच करते हुए निवारण सुनिश्चित कराएँ. 


दरअसल अंचलाधिकारी नगर इसके पहले भी शिकायतों में घिरे रहे हैं. उनके कार्यालय से जुड़े भूमि विवाद सहित अन्य प्रकार के अंचल से जुड़े मामलों में कई लोगों के आवेदन लम्बे समय तक लंबित रहने की बातें पहले भी सामने आई हैं. वहीं डीएम के जनता दरबार में रूचि नहीं लेने का यह मामला अब आम लोगों की शिकायतों को और पुख्ता करने की भांति है. अब डीएम ने उसी कारण अंचलाधिकारी के तीन दिन वेतन कटौती का फरमान सुनाया है. नगर अंचल में पहले भी आम लोगों की मौखिक शिकायत रही है कि उनके काम में लेटलतीफी होती है. अब डीएम की ओर से पाया गया कि अंचलाधिकारी बिना पूर्व सूचना के ही उनके जनता दरबार से अनुपस्थित हैं. 


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