आईएनएस विक्रांत को 2014 के बाद की उपलब्धि न बताएं पीएम मोदी, केंद्र सरकार पर इस कारण हमलावर हुई कांग्रेस

आईएनएस विक्रांत को 2014 के बाद की उपलब्धि न बताएं पीएम मोदी, केंद्र सरकार पर इस कारण हमलावर हुई कांग्रेस

DESK. भारत का पहला विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत शुक्रवार को नौसेना में शामिल किया गया. इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने इसे देश के सामर्थ्य का प्रतीक बताया. प्रधानमंत्री मोदी ने युद्धपोत का निरीक्षण किया और फिर देश के पहले स्वदेशी युद्धपोत आईएनएस विक्रांत को भारतीय नौसेना को समर्पित किया.  इससे पहले नौसेना ने प्रधानमंत्री मोदी को आईएनएस विक्रांत का प्रतीक चिन्ह भेंट किया. वहीं मोदी ने आईएनएस विक्रांत के निर्माण एवं जलावरण की प्रक्रिया में वर्ष 2014 के बाद आई व्यापक तेजी का भी बखान किया. 

हालांकि इसी पर कांग्रेस ने पलटवार किया है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने आईएनएस विक्रांत को लेकर बड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा कि एयरक्राफ्ट कैरियर का श्रेय सभी सरकारों को जाता है. उन्होंने कहा कि आईएनएस विक्रांत को 2014 के बाद की उपलब्धि बताना पूरी तरह से गलत है. उन्होंने कहा कि हमारे प्रधानमंत्री शासन में निरंतरता को कभी नहीं मानते. आईएनएस विक्रांत का कमीशन आज एक बहुत बड़ी उपलब्धि है लेकिन इसे 22 साल पहले शुरू किया गया था. इस दौरान वाजपेयी सरकार, मनमोहन सरकार और मोदी सरकार रही. उन्होंने कहा कि हम भारतीय नौसेना, इंजीनियरों, अधिकारियों और कर्मचारियों की सराहना करते हैं लेकिन यह कहना कि यह पूरी तरह से 2014 के बाद की उपलब्धि है, यह गलत है. इसमें 22 साल लगे और इसका श्रेय सभी सरकारों को जाता है. 

गौरतलब है कि आईएनएस विक्रांत के निर्माण के साथ ही भारत उन देशों के एलीट समूह में शामिल हो गया, जो एयरक्राफ्ट कैरियर बनाने में सक्षम हैं. प्रधानमंत्री मोदी ने इसे युद्धपोत से ज्यादा तैरता हुआ एयरफील्ड बताया, जो तैरते हुए शहर से कम नहीं. उन्होंने कहा कि इसमें जितनी बिजली पैदा होती है उससे 5,000 घरों को रौशन किया जा सकता है. इसका फ्लाइंग डेक भी दो फुटबॉल फ़ील्ड से बड़ा ह.। इसमें जितने तार इस्तेमाल हुए हैं वह कोचीन से काशी तक पहुंच सकते हैं.

क्यों खास है INS विक्रांत : आईएनएस विक्रांत सिर्फ एक एयरक्राफ्ट कैरियर नहीं बल्कि दुश्मनों के खात्मे का प्रतीक है, आत्मनिर्भर भारत की पहचान है. आपको बता दें कि आईएनएस विक्रांत के 76 फीसदी से ज्यादा उपकरण भारत में ही बनाए गए हैं. इसे तकरीबन 20 हजार करोड़ रुपए की लगात से तैयार किया गया है. INS विक्रांत 262 मीटर लंबा और 62 मीटर चौड़ा है. इसी वजह से यह दो फुटबॉल फील्ड से भी बड़ा है. एयरक्राफ्ट कैरियर 28 नॉट्स की अधिकतम रफ्तार के साथ एक बार में 7,500 नॉटिकल मील की दूरी तय कर सकता है.

आईएनएस विक्रांत की सबसे खास बात यह है कि इसका नामकरण भारत के पहले एयरक्राफ्ट कैरियर के नाम पर किया गया है. जिसने 1971 में पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध में निर्णायक भूमिका अदा की थी। इसमें 2400 कंपार्टमेंट्स हैं. इसके अलावा महिला सैनिकों की तैनाती को ध्यान में रखते हुए कैबिन तैयार किए गए हैं.

एयरक्राफ्ट कैरियर अत्याधुनिक उपकरणों और प्रणालियों से लैस है. इसमें चिकित्सा उपकरण सुविधाओं के साथ एक पूर्ण अत्याधुनिक चिकित्सा परिसर है जिसमें ऑपरेशन थिएटर, इमरजेंसी ऑपरेशन थिएटर, फिजियोथेरेपी क्लिनिक, आईसीयू, प्रयोगशालाएं, सीटी स्कैनर, एक्स-रे मशीन, समेत इत्यादि सुविधाएं मौजूद हैं. यह स्वदेश निर्मित उन्नत हल्के हेलीकॉप्टर (एएलएच) और हल्के लड़ाकू विमान (एलसीए) के अलावा मिग-29 के लड़ाकू जेट, कामोव-31 और एमएच-60आर मल्टी रोल हेलीकॉप्टर्स सहित 30 विमानों से युक्त एयर विंग को संचालित करने में सक्षम है.


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