यातायात जागरुकता के नाम पर एनजीओ के साथ बच्चों से बाल श्रम कराने लगे डीएसपी, एक दिन के लिए दिए गए सौ-सौ रुपए

यातायात जागरुकता के नाम पर एनजीओ के साथ बच्चों से बाल श्रम कराने लगे डीएसपी, एक दिन के लिए दिए गए सौ-सौ रुपए

BHAGALPUR : जहां प्रदेश की सरकार से लेकर के अधिकारियों तक बालश्रम उनमुल्लन के लिए तरह तरह के कार्यक्रम और जागरूकता अभियान चलाया जाता है। यहां तक कि बालश्रम विभाग के द्वारा कई दुकान में कार्य कर रहे बच्चे को मुक्त कराकर संबंधित दुकान के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराया जाता है। वहीं दूसरी तरफ सरकार के अधिकारियो और प्रसिद्ध एनजीओ के द्वारा इस तरह के कार्य किए जाय तोह तो आप क्या कहेंगे। बालश्रम को लेकर एक मामला भागलपुर से सामने आया है।

 सड़क सुरक्षा सप्ताह के तहत हो रहे कार्यक्रम में यातायात प्रशासन पुलिस एवं एनजीओ के तहत चलने बाली एनजीओ संस्थान जीवन जागृति सोसायटी लोगों को जागरूक करने का काम कर रही थी जिसमें एक युवक को यमराज बनाकर भैस पर बैठा कर लोगों को यह बताने का काम किया जा रहा था कि आप यातायात के नियमों का पालन करें। वहीं इस कार्यक्रम में कुछ छोटे छोटे  नौनिहाल बच्चे भी हाथ में तख्ती लिए नजर आए, जब उनसे पूछा गया कि आप यहां किस काम के लिए आए हैं। पहले तो उनके पास कोई जवाब ही नहीं था। 

फिर एक बच्चे ने कहा मुझे यहां बुलाया गया है और कहा गया है जैसा करने कहा जाए वैसा ही करना है,इसके लिए बच्चों को 100 रुपये करके दिए भी गए ,यह सारे बच्चे लोदीपुर के रहने वाले थे जिसकी उम्र महज 7 वर्ष 10 वर्ष 12 वर्ष और 13 वर्ष थी। छोटे-छोटे नौनिहाल बच्चे को यह भी नहीं पता था कि हमें करना क्या है और उनके हाथ में तख्ती थमा दी गई थी, उस कार्यक्रम में भागलपुर यातायात पुलिस के यातायात डीएसपी प्रकाश कुमार एवं शिशु रोग विशेषज्ञ डॉक्टर अजय कुमार सिंह के नजरों के सामने सारा कुछ हो रहा था। 

  जब यातायात  डीएसपी प्रकाश कुमार से पूछा गया कि यह अबोध बच्चे यहां किस लिए आए हैं तो उन्होंने साफ बताने से इनकार किया और उन्होंने कहा मुझे नहीं पता यह बच्चे यहाँ कैसे आए हैं, मैंने नहीं बुलाया जबकि उन बच्चों के हाथ में जीवन जागृति सोसायटी और सड़क सुरक्षा सप्ताह के तहत तख्ती देखी गई। अब सवाल यह उठता है की जब पुलिस प्रशासन और गणमान्य चिकित्सक के सामने बाल श्रम उन्मूलन कानून की धज्जियां उड़ाई जा रही है तो सरकार इस पर पाबंदी लगाने वाला नाटक करते क्यों दिख रही है। 

वही जब छोटे छोटे बच्चे से पूछा गया तो उसने कहा हम लोगों को यूं ही बुला लिया गया था और जब कार्यक्रम समाप्त हुआ तो हमलोगों को 100 रुपये करके सभी बच्चों को दिया गया। अब यह सवाल खड़ा हो रहा है कि अगर बच्चे को बुलाया गया तो उसे मालूम क्यों नहीं की उससे क्या कराना था ,वहीं दूसरी ओर उनके हाथ में जीवन जागृति सोसाइटी की तख्ती पकड़ा कर उन्हें काम कराने के बाद 100 रुपये मजदूरी दी गई, आखिर यह कहां तक सही है ? क्या यह जागरूकता रैली का एक पाठ था या फिर बच्चे के भविष्य के साथ खिलवाड़, अब देखने वाली बात यह होगी कि इस पर सरकार क्या संज्ञान लेती है?

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