मासूमों की मौत के खौफ से वीरान होते गांव, 10 नौनिहालों की मौत ने सबकुछ लूट लिया

मासूमों की मौत के खौफ से वीरान होते गांव, 10 नौनिहालों की मौत ने सबकुछ लूट लिया

NEWS4NATION DESK : लाश की उम्र जितनी छोटी हो उसे कंधा देना उतना ही मुश्किल होता है। जी हां यह मुजफ्फरपुर के कई गांव में देखा जा रहा है,जहां कुछ देर पहले तक अपनी किलकारियों से घर के आंगन को गुंजायमान करने वाला मासूम अचानक बुखार से तलफ उठता है, आनन फानन में उसे अस्पताल ले जाया जाता है जहां धरती के भगवान और नीति नियंताओं के सामने लाश में तब्दील हो जाता है। सड़ांध मारती सिस्टम की बदबू से सैंकड़ो मासूम अपनी जान गवां चुके हैं और न जाने कितनों की बारी है। 

यह कहानी मुजफ्फरपुर के कई गांव की है। वैशाली के भगवानपुर गांव पर तो चमकी बुखार कहर बनकर टूटा है,करीब दस से ज्यादा माताओं की कोख सुनी हो चुकी है। गांव की गलियों से कोलाहल और किलकारी विदा ले चुका है। खौफ और गम में डूबी आंखे बाहर का रास्ता अपनाने पर मजबूर है, डर है कि कहीं बचे हुए नौनिहाल भी काल के गाल में न समा जाएं।

लोगों के दिल और दिमाग मे बीते हुए कल का बेइंतहा दर्द, आज का डर और आनेवाले कल का खौफ साफ देखा जा सकता है। 

इनका साफ कहना है कि गांव छोड़कर जाना ही होगा ,यहां रहकर हम अपने बच्चे के मौत को आमंत्रण क्यों दें।

सवाल लाख टके का है,की क्या सुशासन में मासूमों की मौत की कीमत नहीं होती,,नेताओं का आना जाना, बेतुके बोल और जहर घोल रहे हैं. जरूरत है कि इस बीमारी का निदान निकाला जाए ताकि नौनिहालों को मौत के निवाला बनने से बचाया जाए।

Find Us on Facebook

Trending News