जब लता दी के गीतों को गाकर 16 दिन अपने अकेलेपन का समय काटा था शारदा सिन्हा ने

जब लता दी के गीतों को गाकर 16 दिन अपने अकेलेपन का समय काटा था शारदा सिन्हा ने

पटना. स्वर कोकिला लता मंगेशकर के निधन पर बिहार कोकिला शारदा सिन्हा ने अपने संस्मरणों के साथ उन्हें याद किया और श्रद्धांजलि दी. उन्होंने बताया कि कैसे जब शारदा सिन्हा पिछले साल कोरोना पॉजिटिव हो गई थी तब उन्हें लता मंगेशकर के गानों का सहारा मिला. 

शारदा सिन्हा ने एक वीडियो संदेश के माध्यम से बताया कि जब पिछले साल वह कोरोना से संक्रमित हुई थी तब 16 दिनों तक अकेले में रहने के दौरान उन्होंने लता जी का एक खास गीत गुनगुना कर समय बिताया था. उन्होंने कहा कि लता दी के उस गीत से मुझे कोरोना के विषम काल में बड़ा साहस मिला. प्रतिकूल परिस्थितियों में उस समय लता मंगेशकर के गाने को गाकर उन्होंने 16 दिनों का वह अकेलापन काटा था. 

उन्होंने रुंधे कंठ से उस गाने को गुनगुनाया भी. यूँ हसरतों के दाग मुहब्बत में धो लिए... खुद दिल से दिल की बात कही और रो लिए... घर से चले थे हम तो ख़ुशी की तलाश में ये चुप सी क्यों लगी है अजी कुछ तो बोलिए... खुद दिल से दिल की बात कही और रो लिए... 

इस गाने को गुनगुनाते हुए शारदा सिन्हा ने अपने कोरोना काल के विषम दौर को याद किया और कैसे उन्हें लता दी के इस गीत से संबल मिला उसका जिक्र किया. उन्होंने कहा कि वे चाहती हैं कि लता जी का जब दोबारा जन्म हो तब वह फिर से भारत में ही पैदा हों. 


बिहार कोकिला शारदा सिन्हा ने वीडियो संदेश में लता दी से जुड़े अपने कई राज खोले. उन्होंने कहा कि वे बचपन से ही लता की फैन थी. उन्हें बचपन से पत्र लिखती थी. लेकिन आज तक उनकी लता मंगेशकर से मुलाकात नहीं हो पाई. इसका उन्हें आज भी मलाल है. उन्होंने कहा, लता दी से मिलने की मेरी आस पूरी नहीं हुई. सौभाग्यशाली रही कि ‘मैंने प्यार किया’ और ‘हम आपके हैं कौन’ इन दोनों फिल्मों में मैंने गाया जिसमें लता दी ने भी गाया था. ऐसा अवसर कम को मिलता है.

उन्होंने कहा, लता दीदी को माँ सरस्वती स्वयं आकर अपने साथ ले गई. आज सरस्वती विसर्जन पर उनका निधन होना कुछ वैसा ही है. धरती पर वह सरस्वती की पुत्री थी. 92 सैलून से हम उनसे प्रेरणा ले रहे थे. उनके गीत सदा अमर रहेंगे. उनके गीतों का सुकून जो लोगों ने सुना, हर भाषाभाषी ने मान दिया सब आज व्यथित हैं. पूरे राष्ट्र में आज शोक की लहर है. 

बिहार कोकिला ने कहा कि आज लता दी हमारे बीच नहीं हैं लेकिन उनके अमर गीत सदा अमर रहेंगे. वे सदा गीतों के माध्यम से हमारे बीच रहेंगी. कितने ही कलाकार उनसे प्रेरित रहे. उन्होंने हर विधा के गीत गाये. उनके गीतों में जो सुकून था वह शायद ही किसी अन्य में हो. 

उन्होंने कहा कि बहुत सारे संघर्षों के बाद सोने की तरह तपा हुआ लता दी का व्यक्तिव ऐसा था कि वह देश का गौरव थी . वह ऐसी शख्सियत थी जो विश्व में सिर्फ हमारे पास थी. शारदा सिन्हा ने कहा कि वः बचपन से ही लता दी की फोलोवर रही. लता दी का पता जानकर उन्हें बचपन से पत्र लिखा. उनका मुम्बई के घर का पता भी शारदा को मुंह जबानी याद था. उन्होंने कहा कि लता दी का प्रभुकुंज का पता मुझे छोटी उम्र से याद था और उन्हें कई पत्र लिखे. 


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