पहले चलता था संपत्ति क्रेडिट कार्ड- जमीन दो नौकरी लो, अब चलता हैं स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड- आर्थिक हल युवाओं को बलः नीरज कुमार

पहले चलता था संपत्ति क्रेडिट कार्ड- जमीन दो नौकरी लो, अब चलता हैं स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड- आर्थिक हल युवाओं को बलः नीरज कुमार

PATNA: राजद के 25 साल बनाम 25 सवालों में से जदयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने 19वां सवाल पूछा। उन्होनें कहा कि जब से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को बिहार के लोगों की सेवा का अवसर मिला हर क्षेत्र-तबके के लिए काम किया। तमाम विपदा-बाधा को पार करते हुए नीतीश सरकार ने कई ऐसी योजनायें धरातल पर उतारी जिसके कायल दूसरे राज्य भी हो गए। हमारा निश्चय था कि आर्थिक हल युवाओं को बल के तहत युवा पीढ़ी के भविष्य को सवारेंगें। हमारे लिए यह महत्वपूर्ण है। बैंको की उदासीनता, असहयोग मिलता देख हमने शिक्षा वित्त निगम बनाया और आज समाज के सभी तबके के छात्र-छात्राओं को ऋण उपलब्ध करा रहे हैं। दूसरी तरफ पिछली सरकार (लालूवाद) को जब बिहार की जनता ने काम करने का अवसर दिया तो बेटा-बेटी ने नाम पर संपत्ति क्रेडिट कार्ड योजना शुरू कर दिया। इस योजना के तहत जमीन दो नौकरी लो फार्मूला अपनाकर  बेबस लोगों की जमीन बेटा-बेटी के नाम करा लिया।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा 2 अक्टूबर 2016 को राज्य के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए लोन उपलब्ध कराने हेतु बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना का शुभारम्भ किया गया। योजना के अंतर्गत बिहार के गरीब 12वीं पास छात्र-छात्राओं को उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए राज्य सरकार द्वारा 4 लाख रूपये तक का लोन वित्तीय सहायता के रूप में प्रदान किया जाता है। सरकार ने शिक्षा वित्त निगम की स्थापना भी की। जिससे इस स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड स्कीम को सफलतापूर्वक राज्य में चलाया जा सके। इस योजना की मदद से विद्यार्थी उच्च शिक्षा के साथ साथ रोजगार प्राप्त करने में भी सफल होंगे। बैंकों से अपेक्षित सहयोग नहीं मिलने के बाद 1 अप्रैल 2018 से शिक्षा वित्त निगम का गठन कर राज्य सरकार इस योजना का संचालन कर रही है। वर्तमान में इस योजना के अंतर्गत उपलब्ध कराए गए ऋण राशि पर छात्रों के लिए 4% सरल ब्याज दर,महिला दिव्यांग एवं ट्रांसजेंडर आवेदकों के लिए मात्र 1% सरल ब्याज दर से उपलब्ध कराया जाता है। ऋण की राशि मोराटोरियम अवधि के उपरांत गणना की जाती है, यानी आवेदक को मोराटोरियम अवधि तक ब्याज मुक्त राशि देने का प्रावधान है। इस योजना में ऋण वापसी की प्रक्रिया को सरल बनाया गया है। 84 मासिक किस्तों में पाठ्यक्रम समाप्ति के 1 वर्ष के उपरांत प्रारंभ होता है। आवेदक के रोजगार या अन्य साधनों से आय नहीं होने की स्थिति में ऋण राशि की वसूली की प्रक्रिया स्थगित रखे जाने का प्रावधान है। इस योजना का लाभ लेने की शर्तों को सरल व पारदर्शी बनाया गया है। 

नीतीश सरकार ने प्रारम्भ से लेकर अब तक इस योजना के अन्तर्गत लगभग 1 लाख 35 हजार आवेदकों के 33 सौ करोड़ की ऋण राशि स्वीकृत करते हुए लगभग 17 सौ करोड़ की राशि वितरित कर चुकी है। विभिन्न सामाजिक वर्गों एवं समूहों के आधार पर अब तक लगभग 23 हजार अत्यंत पिछड़े वर्ग, लगभग 41 हजार सामान्य वर्ग, लगभग 55 हजार पिछड़े वर्ग, लगभग 12 हजार 5 सौ अनुसूचित जाति एवं लगभग 16 सौ अनुसूचित जन जाति के छात्र-छात्राओं के द्वारा योजना का लाभ प्राप्त किया जा चुका है।

राजद बताये कि लालूवाद अगर विचारधारा है तो समाज के पिछड़े-अति पिछड़े-दलित-महादलित व अन्य सभी तबके के युवाओं को आगे बढ़ाने के लिए सरकार में रहते ऐसी कोई ऐसी योजना धरातल पर उतारा? जिससे लाभ उठाकर छात्र-छात्रायें पढ़ाई करके स्वावलंबी बनते? या सिर्फ बेटा-बेटी के नाम संपत्ति क्रेडिट कार्ड (जमीन दो नौकरी लो) चलाना ही अंतिम लक्ष्य था?

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