एथेनॉल उत्पादन को लेकर किसानों में जगी नई उम्मीद, सरकार से कर दी यह मांग

एथेनॉल उत्पादन  को लेकर किसानों में जगी नई उम्मीद, सरकार से कर दी यह मांग

कटिहार। केंद्र सरकार द्वारा बिहार में एथेनॉल के उत्पादन अनुमति मिलने के बाद राज्य सरकार आप इस पर जल्द बड़ी कार्य योजना बनाने की बात कह रहे हैं। जिसकोलेकर कोसी और सीमांचल के किसानों में एक नई उम्मीद नजर आ ने लगी है। इन क्षेत्रों में एथेनॉल उत्पादन को लेकर कुछ समस्याएं भी है, जिसको लेकर उन्होंने खुलकर अपनी बात रखी है।

 बाढ़ और कटाव से बदहाली,बर्बाद उद्योग धंधा बिहार के सीमांचल इलाके की विशेष पहचान रहा है, बिहार के सबसे पिछले इलाकों में खेती ही रोजगार का एक मात्र बड़ा साधन है, खासकर यहां मक्का, केला,मखाना और जुट जैसा कृषि उत्पादन बहुत हद तक रोजगार का दिशा और दशा तय करता है,इस बीच केंद्र सरकार की अनुमति से अब बिहार में एथेनॉल उत्पादन शुरू होने की चर्चा को लेकर किसानों में नई उम्मीद जगी है। सीमांचल के किसान कहते हैं कि सीमांचल में गन्ना उत्पादन न के बराबर होता है, ऐसे में बिहार के अन्य जो भी इलाके के किसानों को यह लाभ मिला है उसके लिए वे लोग सरकार के शुक्रिया अदा करते है,साथ ही चाहते हैं कोसी और सीमांचल के इस इलाके में मक्का, मखाना,केला या जुट से भी जुड़े कोई उद्योग स्थापित किया जाए ताकि यहां के किसानों को लाभ मिल सके बताते चलें 

कटिहार के सदर अनुमंडल के अलावे कोढ़ा और मनिहारी अनुमंडल में भी बड़े पैमाने पर मक्का,मखाना, केला और जूट का उत्पादन होता है,ऐसे में अब इस इलाके से उप मुख्यमंत्री बनने से किसानों को अब जल्द ही इन फसलों के आधारित उद्योग लगने की उम्मीद है। वही उपमुख्यमंत्री तारकेश्वर प्रसाद केंद्र सरकार की अनुमति से इथेनॉल उत्पादन को लेकर बड़ी उम्मीद जताते हुए आगे कहते हैं कि सीमांचल में भी कृषि आधारित उद्योग लगने की बड़ी संभावना है और सरकार आने वाले दिनों में निश्चित इस पर विचार करेंगे। उन्होंने कहा कि बंद पड़े चीनी मिलों का प्रयोग एथेनाल बनाने का लिए किया जाएगा। डिप्टी सीएम ने कहा कि एथेनॉल से 20 फीसदी पेट्रोल की बचत हगी।


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