हाईकोर्ट में नए जजों की नियुक्ति के बाद भी पूरी समस्या नहीं सुलझी, अधिवक्ताओं ने बताई अपनी परेशानी

हाईकोर्ट में नए जजों की नियुक्ति के बाद भी पूरी समस्या नहीं सुलझी, अधिवक्ताओं ने बताई अपनी परेशानी

PATNA : पटना हाई कोर्ट में नए जजों के आने से अब लंबित पड़े आपराधिक मामलों की  सुनवाई रफ्तार पकड़ने संभावना को बल मिला है ।  पिछले कुछ दिनों मे  स्थानांतरण व नई नियुक्तियों के होने से पटना हाई कोर्ट जजों की संख्या 17 से बढ़ कर 26 हो गई हैं। लेकिन समस्या अब भी पूरी तरह से नहीं सुलझी है।


एक लाख सिविल मुकदमों के लिए 5 एकलपीठ

 पूजा अवकाश के बाद कोर्ट खुलते ही पटना हाई कोर्ट में  वकीलों में उत्साह दिखाई देने लगा। लेकिन वे इस बात को लेकर चिन्तित दिखें कि  एक लाख से अधिक लम्बित पड़े सिविल मामलों की सुनवाई के लिए केवल 5 एकलपीठ ही गठित हुए हैं।  जिसके कारण कई केसों की सुनवाई शुरू होने में देर हो सकती है।

गौरतलब हैं कि  दूसरे हाई कोर्ट से स्थानांतरित होकर आए तीन  जज जहां डिवीजन बेंच में बैठे ,वहीं नवनियुक्त छह जजों ने एकलपीठ में बैठकर   पुराने लम्बित  ज़मानत अर्ज़ियां पर सुनवाई किया। वही दूसरी ओर रिट समेत सिविल मामलों पर  सुनवाई करने के लिए बहुत कम जज  होने के कारण वकीलों ने निराशा जताई।  हाई कोर्ट में आपराधिक मामलों पर सुनवाई हेतु  जहां एक ओर 16 एकलपीठ गठित हुई है। 

वहीं रिट याचिकाओं समेत  अन्य सिविल मामलों पर सुनवाई के लिए सिर्फ 5 जज ही हैं। इसमें भी अभी सिर्फ चार ही कार्यरत हैं । जस्टिस अनिल कुमार उपाध्याय की  बीमारी की वजह से उनकी एकलपीठ  फिलहाल सुनवाई नही कर रही है।

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