जातीय जनगणना के बाद विशेष राज्य के दर्जे को लेकर भी सत्ताधारी दल भाजपा-जदयू आमने-सामने, मोदी सरकार को लिखा पत्र

जातीय जनगणना के बाद विशेष राज्य के दर्जे को लेकर भी सत्ताधारी दल भाजपा-जदयू आमने-सामने, मोदी सरकार को लिखा पत्र

Desk. बिहार में सत्ताधारी के दल लगातार आमने सामने हो रहे हैं. एनडीए के दो बड़े घटक दल भाजपा और जदयू के बीच जातीय जनगणना और बिहार को विशेष राज्य के दर्जे पर मतभेद दिख रहा है. बिहार में जदयू जातीय जनगणना और बिहार के विशेष राज्य के दर्जे की मांग के पक्ष में है. वहीं भाजपा इसके विरोध में है. भाजपा का कहना है कि जातीय जनगणना बिहार में तकनिकी रूप से संभव नहीं है. वहीं बिहार को विशेष पैकेज मिल ही रहा है, तो फिर बिहार को विशेष राज्य के दर्जे की जरूरत नहीं है. तो ऐसे में क्या बिहार में महागठबंधन के बाद अब एनडीए भी टूटने के कगार पर हैं?

दरअसल बिहार सरकार में मंत्री बिजेंद्र यादव ने नीति आयोग की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा है कि रिपोर्ट में बिहार को देश का सर्वाधिक गरीब राज्‍य बताया गया है. इसलिए बिहार को विशेष राज्य का दर्ज मिलना चाहिए. इसको लेकर नीतीश सरकार ने केंद्र को एक पत्र लिखा है. मंत्री ने बताया है कि बिहार प्रति व्‍यक्ति आय, मानव विकास व जीवन स्तर के मानकों पर राष्‍ट्रीय औसत से नीचे है. उन्‍होंने इसके लिए बिहार में प्राकृतिक संसाधनों व जलीय सीमा के अभाव तथा अत्‍यधिक जनसंख्‍या घनत्‍व को जिम्‍मेदार बताया है. यह भी कहा है कि बिहार बाढ़ व सूखा प्रभावित प्रदेश भी है. यहां के आधे से अधिक जिले इन प्राकृतिक आपदाओं को झेलते रहते है.

मंत्री बिजेंद्र यादव ने बिहार की स्थिति के लिए केंद्र सरकार को भी जिम्‍मेदार ठहराया है. उन्होंने कहा है कि केंद्र सरकार ने बिहार में औद्योगिक विकास व तकनीकी शिक्षा की पहल नहीं की. न हीं यहां पब्लिक सेक्‍टर की स्‍थापना की पहल की है. इसके अलावा बिहार हरित क्रांति के लाभ से भी वंचित रहा. इस कारण यहां कृषि का भी संतोषजनक विकास नहीं हुआ है.


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