अनाज के लूट में डीलर से लेकर अधिकारी तक सबकी हिस्सेदारी तय, ठगे जा रहे हैं गरीब लाभार्थी

अनाज के लूट में डीलर से लेकर अधिकारी तक सबकी हिस्सेदारी तय, ठगे जा रहे हैं गरीब लाभार्थी

SUPAUL : अनुमंडलीय क्षेत्र में पीडीएस व्यवस्था पर अधिकारियों की पकड़ ढीली होने से लाभुकों को इसका उचित लाभ अब नहीं मिल रहा। लाभुकों का कहना है कि डीलर व अधिकारियों की मिलीभगत से चल रहे खेल की वजह से लाभुकों की बजाय अधिकारी व डीलर अपना पेट भर रहे हैं। पूरे क्षेत्र में पीडीएस की बिगड़ती हालत से बेखबर अधिकारी जांच के नाम पर मोटी रकम वसूल कर अपने पेट भरने में मशगूल है, ऐसा आरोप क्षेत्र के सैकड़ो लाभुकों ने लगाया है। जांच के नाम पर चल रहे गोरखधंधे की वजह से गरीब तबके के लोगों के बीच निराशा का भाव सरकार के प्रति जगने लगा है। 

एक किलो अनाज कम

वितरण व्यवस्था को लेकर जारी नई गाइडलाइन के अनुसार प्रति यूनिट चार किलो चावल व एक किलो गेंहू का वितरण लाभुकों को किया जाना है लेकिन जमीनी हकीकत यह की लाभुकों को सिर्फ चावल वितरित किया जा रहा है, वह भी धड़ल्ले से। लाभुकों के अनुसार प्रति यूनिट पांच किलो अनाज की बजाय प्रति यूनिट चार किलो अनाज दिया जा रहा है जिससे निम्न स्तरीय कार्डधारियों को परिवार के भरण पोषण में काफी जद्दोजहद करनी पड़ रही है।


वसूली में लगे अधिकारी

नाम नहीं छापने की शर्त पर डीलर एवं पैक्स अध्यक्ष ने बताया की पीडीएस में मामूली कमीशन इसके बाद गोदाम प्रबंधक लाने का किराया व अन्य तरह के खर्चे को जोड़ दे तब डीलर के हाथ आमदनी के रूप में कुछ रकम ही आती है जिससे डीलर के परिवार का भरण पोषण मुश्किल है, ऐसे में थोड़ा बहुत गड़बड़ी सभी जगह चलता है। कुछ डीलर ने बताया कि प्रत्येक माह कमीशन के नाम पर तय हिस्सा डीलर संघ के अध्यक्ष को देना पड़ता है, क्योंकि उन्ही के आदेश पर आवंटन देता है, नहीं देने पर लाइसेंस रद्द करने की धमकी देते हैं, क्या करें जमीन बेचकर तो नहीं देंगे। उसी में से काट छांट बचाते हैं फिर बेचकर महीनों का तय हिस्सा देते हैं।

अधिकारी का कंट्रोल

डीलरों ने अधिकारियों के लिए कामधेनु बन चुके पीडीएस सिस्टम को लेकर कई विपक्षी दलों के नेताओं ने भी सवाल उठाए है। उन्होंने अधिकारी की संलिप्तता की बात कहते हुए बताया की पहले अंगूठा लेकर डीलर अनाज दिया करता था अब जबकि ऑनलाइन पॉश मशीन आ गई है उसका पूरा कंट्रोल अधिकारियों के जिम्मे है। कुछ डीलरों ने बताया कि  तो दो से तीन महीने का अनाज केंद्र सरकार द्वारा कोरोना के मद्देनजर भेजा गया था, लेकिन वह पीडीएस तक नहीं पहुंचा, यह अनाज अब कहां है। इस पर गम्भीर सवाल खड़ा होता है। हालांकि विभागीय अधिकारी भी कुछ बोलने को तैयार नही है जो कि एक और बड़ा गंभीर सवाल है, कि इस चावल लूट के खेल में बहुत बड़ा झोल है।

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