बिहार स्वास्थ्य विभाग की नाकामी : टीका एक्सप्रेस ने नहीं पकड़ी स्पीड, 35 दिनों में सिर्फ 6429 को लगाया वैक्सीन

बिहार स्वास्थ्य विभाग की नाकामी : टीका एक्सप्रेस ने नहीं पकड़ी स्पीड,  35 दिनों में सिर्फ 6429 को लगाया वैक्सीन

PATNA : बड़ी उम्मीदों के साथ बिहार में बीते 3 जून को राज्य सरकार ने टीका एक्सप्रेस की शुरुआत की थी, ताकि सभी लोगों को उनके घर पर ही कोरोना का टीका लगायी जा सके। लेकिन बिहार की खराब स्वास्थ्य व्यवस्था यहां भी सामने आ गई। टीका एक्सप्रेस सिर्फ नाम तक ही सीमित रह गई। कार्यक्रम के शुरू होने के बाद से यह कभी गति नहीं पकड़ सकी। जिन उम्मीदों के साथ इस कार्यक्रम को शुरू किया गया, वह पूरी तरह से टूट चुकी है। पिछले 35 दिन में पटना में टीका एक्सप्रेस से सिर्फ 6459 लोगों को ही वैक्सीन लगाई जा सकी है। जबकि इस दौरान 2.80 लाख लोगों का वैक्सीनेशन हो जाना था।

बीते माह तीन जून को स्वास्थ्य मंत्री ने एक साथ प्रदेश के सभी जिलों के लिए 121 टीकाकरण एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। हर दिन टीका एक्सप्रेस को 200 लोगों को वैक्सीन लगाने का लक्ष्य दिया गया था, लेकिन इस कोशिश में स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से फेल साबित हो गया है। कम से कम टीकारण एक्सप्रेस के जो आंकड़े हैं, वह बताता है कि कार्यक्रम सिर्फ पैसों की बर्बादी तक सीमित रह गई है। 

पटना की हालत खराब

बिहार में 121 गाड़ी को टीका एक्सप्रेस बनाया गया है। पटना में 40 गाड़ी है और एक गाड़ी को एक दिन में 200 वैक्सीनेशन का लक्ष्य है। ऐसे में एक दिन में 40 गाड़ी को 8000 वैक्सीनेशन का लक्ष्य हो गया। गाड़ियां 3 जून से ही पटना के अलग अलग शहरी वार्डों में दौड़ रही हैं। 35 दिन में यह 2.80 लाख हो गया, लेकिन पटना में टीका एक्सप्रेस से वैक्सीनेशन का आंकड़ा 10 हजार को भी पार नहीं कर सका है। 40 टीका एक्सप्रेस अब तक 35 दिनों में 6429 लोगों का वैक्सीनेशन कर पाई हैं। इसमें पहला डोज लेने वालों की संख्या 5539 और दूसरा डोज लेने वालों की संख्या मात्र 890 है। टीका एक्सप्रेस की रफ्तार ऐसे सुस्त रही तो लक्ष्य कैसे पूरा होगा।

कार्यक्रम नाकाम, फिर भी मेयर का सम्मान

आंकड़े बता रहे हैं कि पटना में टीका एक्सप्रेस के पहियों की हवा निकल गई है। फिर भी अधिकारी कार्यक्रम को लेकर खुश नजर आ रहे हैं।  बताया जा रहा है कि कोरोना को हराने के लिए चल रहे टीकाकरण अभियान में अजीमाबाद स्थित वार्ड संख्या 58 सबसे आगे है। दावा किया जा रहा है कि यहां रहने वाले अधिकांश लोगों ने टीकाकरण करवा लिया है। इस उपलब्धि पर जिला प्रशासन ने महापौर, पूर्व कार्यपालक पदाधिकारी, सिटी मैनेजर सहित अन्य कई लोगों का सम्मान किया है। अब सवार यह है कि अगर शहरी वार्ड में टीका के लिए मेयर सम्मानित की जा रही हैं तो टीका एक्सप्रेस की रफ्तार क्यों कम है। टीका एक्सप्रेस का लक्ष्य क्यों नहीं पूरा हो रहा है।

पार्षद भी उठा रहे हैं सवाल 

राजधानी पटना में टीका एक्सप्रेस को लेकर पार्षदों का कहना है कि हर दिन गाड़ी नहीं आ रही है। अगर गाड़ी आ भी गई तो वैक्सीन नहीं होता है।  वार्ड पार्षदों का तो यहां तक कहना है कि टीका एक्सप्रेस से मात्र खानापूर्ति की जा रही है। वार्ड में टीका एक्सप्रेस आने के बाद भी लोगों को दूसरे क्षेत्रों में जाकर वैक्सीनेशन करना पड़ रहा है। ऐसे में टीका एक्सप्रेस का क्या काम है। जब सरकार की मंशा ही नहीं पूरी हो रही है। 


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