फारबिसगंज गोलीकांड से सुर्खियों में आये थे अशोक अग्रवाल, बीजेपी ने मुसीबत से निकाला था

फारबिसगंज गोलीकांड से सुर्खियों में आये थे अशोक अग्रवाल, बीजेपी ने मुसीबत से निकाला था

PATNA : कटिहार लोकसभा सीट को लेकर एनडीए की पेशानी पर बल पड़ गए हैं। इसी पर जेडीयू के दुलाल चंद गोस्वामी जेडीयू के उम्मीदवार हैं लेकिन बीजेपी के एमएलसी अशोक अग्रवाल के बागी होने से एनडीए की परेशानी बढ़ गई है। इस परेशानी से निपटने के लिए बीजेपी प्रदेश नेतृत्व कभी अशोक अग्रवाल को चेतावनी दे रहा है तो कभी मान मनौव्वल कर रहा। हम आपको बता रहे हैं कि आखिर अशोक अग्रवाल का नाम पहली बार सुर्खियों में कब आया था। 

बीजेपी नेता अशोक अग्रवाल का नाम पहली बार उस वक़्त सुर्खियों में आया जब साल 2011 में अररिया के फारबिसगंज में पुलिस फायरिंग की घटना हुई। 3 जून 2011 को हुई इस पुलिस फायरिंग में आठ माह के एक बच्चे और महिला सहित 4 लोगों की मौत हो गई। बियाडा की जमीन पर बने जिस स्टार्च फैक्र्टी से सटे रास्ते को बंद किये जाने से नाराज़ भजनपुर गांव के ग्रामीण पुलिस से भीड़े, वह फैक्ट्री अशोक अग्रवाल की बताई गई। फारबिसगंज गोलीकांड की घटना ने देश भर को हिलाकर रख दिया था। उस वक़्त बिहार में एनडीए पार्ट 1 की सरकार थी। मुख्यमंत्री नीतीश और उपमुख्यमंत्री की कुर्सी पर सुशील कुमार मोदी थे। विपक्ष लगातार यह आरोप लगता रहा कि बीजेपी का एमएलसी होने के कारण राज्य सरकार अशोक अग्रवाल को इस मामले में बचाती रही। 

मानवाधिकार संगठनों से किरकिरी झेलने के बाद आखिरकार नीतीश सरकार ने इस घटना की न्यायिक जांच के आदेश दिए। हालांकि इस पूरे मामले की रिपोर्ट भी सामने आ चुकी है लेकिन अशोक अग्रवाल इससे पाक-साफ निकल गए। संभव है कि अशोक अग्रवाल को बीजेपी का विधान पार्षद रहने का फायदा मिला हो लेकिन आज वही अशोक अग्रवाल बीजेपी और नीतीश कुमार की पार्टी के उम्मीदवार के लिए मुसीबत बन गए हैं।

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