फ़िल्म ‘छिछोरे’ रिव्यू: एक बार फिर से एक नए संदेश के साथ आए निर्देशक नितेश तिवारी

फ़िल्म ‘छिछोरे’ रिव्यू: एक बार फिर से एक नए संदेश के साथ आए निर्देशक नितेश तिवारी

 वर्ष 2016 में आई नितेश तिवारी द्वारा निर्देशित व अभिनेता आमिर खान स्टारर फ़िल्म ‘दंगल’ ने एक बहुत बड़ा मैसेज दिया था। ऐसे में उनकी ‘दंगल’ के बाद दूसरी फ़िल्म ‘छिछोरे’ बड़े पर्दे पर लग गई है, और लगते ही दर्शकों को खूब पसंद आ रही है। इसके साथ ही लोगों का मानना है इस फ़िल्म ने भी एक अच्छा मैसेज दिया है। 

 अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत और अभिनेत्री श्रद्धा कपूर स्टारर फ़िल्म ‘छिछोरे’ ने आज बड़े पर्दे पर दस्तक दे दी है। इस फ़िल्म की शुरुआत राघव नाम के युवा लड़के से होती है जिसके तलाकशुदा माता-पिता (श्रद्धा कपूर-सुशांत सिंह राजपूत) इंजीनियरिंग कॉलेज के रैंक होल्डर स्टूडेंट रह चुके हैं और माता-पिता की वजह से उसपर भी इस बात का बहुत दबाव होता है कि वह भी सलेक्ट हो जाए। इसके बाद कुछ ऐसा होता है कि अपने बेटे को सुशांत सिंह राजपूत अपने कॉलेज के किस्से सुनाने लगते हैं। इन्ही किस्कों को फिर पूरी फ़िल्म में दर्शाया गया है। 

अनिरुद्ध (सुशांत सिंह राजपूत) का बेटा राघव (मोहम्मद समद) पढ़ाई -लिखाई में बहुत होनहार और मेहनती है और एंट्रेंस एग्ज़ाम में सिलेक्ट होने के प्रेशर से गुजर रहा है। माया (श्रद्धा कपूर) से डिवॉर्स लेने के बाद अनिरुद्ध सिंगल पैरंट है। एंट्रेंस एग्जाम्स में जब राघव का सिलेक्शन नहीं हो पाता, तो वह इस सदमे को बर्दाश्त नहीं कर पाता और दोस्त की बिल्डिंग से कूदकर जान देने की कोशिश करता है। खुदकशी की कोशिश में उसके दिल-दिमाग पर गहरी चोट लगती है। अनिरुद्ध जब बेटे को हाथों से जाता हुआ देखता है, तो बेटे को बचाने के लिए अपने हॉस्टल डेज के दौर में ले जाता है। 

हॉस्टल में माया के प्यार के साथ उसे सेक्सा( वरुण शर्मा), डेरेक (ताहिर राज भसीन), एसिड (नवीन पॉलीशेट्टी), बेवड़ा (सहर्ष शुक्ला), क्रिस क्रॉस( रोहित चौहान), मम्मी (तुषार पांडे) जैसे जिगरी दोस्तों की दोस्ती मिलती है, तो रेजी (प्रतीक बब्बर) जैसे अव्वल स्टूडेंट की राइवलरी। गहन बेहोशी में जा चुके राघव की बॉडी पिता अनिरुद्ध की यादों के साथ रिस्पॉन्ड करने लगती है। अनिरुद्ध अपने हॉस्टल के इन सभी जिगरी यारों को इकट्ठा करता है। अनिरुद्ध राघव को बताता है कि कैसे वे हॉस्टल में लूजर्स के नाम से कुख्यात उन लोगों ने खुद को लूजर्स के टैग से मुक्त करने की कोशिश की थी, मगर अनिरुद्ध के अतीत की कहानी से राघव की हालत क्रिटिकल हो जाती है। क्या अनिरुद्ध, माया और उनके दोस्तों का पास्ट राघव को बचा पाएगा। 

यह जानने के लिए आपको फिल्म देखनी होगी।

 


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