फिल्म निर्माता ने चुनाव से पहले लौटाया पद्मश्री सम्मान,नागरिकता संशोधन बिल से खफा हैं अरिबम श्याम शर्मा

फिल्म निर्माता ने चुनाव से पहले लौटाया पद्मश्री सम्मान,नागरिकता संशोधन बिल से खफा हैं अरिबम श्याम शर्मा

NEW DELHI : लोकसभा चुनाव से पहले देश में एक बार फिर अवार्ड वापसी शुरु हो गया है। हालांकि  इस बार यह असहिष्णुता के मुद्दे पर नहीं बल्कि नागरिकता संशोधन बिल के खिलाफ शुरू हुआ है। मणिपुर के जाने माने फिल्मकार और कंपोजर अरिबम श्याम शर्मा ने 2006 में प्राप्त पद्मश्री सम्मान को वापस कर दिया है। बताया जा रहा है कि उन्होंने यह सम्मान नागरिकता संशोधन विधेयक के विरोध में किया है। रविवार को इंफाल स्थित अपने आवास से अरिबम ने सम्मान को वापस करते हुए कहा कि 'नागरिकता बिल के विरोध में उन्होंने ये सम्मान वापस करने का फैसला किया है। 

गौरतलब है कि पूर्वोत्तर राज्यों में कई सामाजिक संगठन नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा नागरिकता विधेयक में किए गए संशोधनों का लगातार विरोध कर रहे हैं। यह बिल नागरिकता कानून 1955 में संशोधन के लिए लाया गया है। इस बिल के कानून बनने के बाद अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई धर्म के मानने वाले अल्पसंख्यक समुदायों को 12 साल के बजाय 6 साल भारत में गुजारने पर भारतीय नागरिकता मिलने का रास्ता साफ हो जाएगा।

बिहार चुनाव के दौरान भी शुरू हुआ था अवार्ड वापसी

आापको बता दें कि इससे पहले बिहार विधानसभा चुनाव के समय अवार्ड वापसी मुहिम शुरु हुई थी। साहित्य अकादमी के पूर्व अध्यक्ष विश्वनाथ प्रसाद तिवारी ने दावा किया था है कि उनके पास इस बात के पक्के सबूत हैं कि 2015 का तथाकथित 'अवार्ड वापसी' अभियान का मकसद राजनीतिक था और उसका मकसद बिहार विधानसभा चुनाव के मद्देनजर केंद्र सरकार को बदनाम करना था। हिंदी लेखक और कवि अशोक वाजपेई की अगुवाई में 2015 में 50 से अधिक साहित्यकारों ने अपने पुरस्कार यह कहते हुए वापस कर दिए थे कि मोदी सरकार के आने के बाद देश में असहिष्णुता बढ़ गई है।


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