वाल्मीकि टाईगर रिज़र्व के जंगलों में लगी आग, बेशकीमती जड़ी-बूटियां जलकर राख

वाल्मीकि टाईगर रिज़र्व के जंगलों में लगी आग, बेशकीमती जड़ी-बूटियां जलकर राख

BAGAHA: मई माह में तापमान बढ़ने के साथ ही वाल्मीकि टाईगर रिजर्व में आग लगने के मामले बढ़ते जा रहे हैं. रिज़र्व के कई कक्षों में आग लगने से अब तक करोडो की सम्पति को नुकसान पहुंचा है. हालाँकि गर्मी का मौसम शुरू होने से पहले आग पर काबू पाने के कई दावे किये जाते हैं. इसके बावजूद असामाजिक तत्वों ने वीटीआर के जटाशंकर वन परिसर के कक्ष संख्या टी 40 के जंगल में आग लगा दी. इससे क्षेत्र के जंगल का बड़ा हिस्सा आग की चपेट में आ गया. आग लगने से अनेक बेशकीमती जड़ी बूटियां और पेड़ पौधे जलकर राख हो गए. अनेक प्रजातियों के छोटे-छोटे पौधे भी जल गए. देखते ही देखते आग ने जंगल के एक बड़े हिस्से को चपेट में ले लिया और क्षेत्र धुएं से भर गया. समय रहते आग पर काबू नहीं पाया जाता है तो बड़ा नुकसान हो सकता है. 

आग से जहां वन संपदा तबाह हो रही है. वहीं वन्य प्राणी पलायन के साथ अकाल मौत के मुंह में समा रहे हैं. जंगलों की आग को लेकर वन विभाग भी असहाय बना हुआ है. विभाग को आग की जानकारी तब लगती है जब आग पूरे जंगल को चपेट में ले लेती है. दूर-दराज जंगलों में आग की घटना के गिने-चुने मामले ही देखे जाते हैं. इससे यही लगता है कि आग की चिंगारी सुलगाने में नजदीक के गाँव के लोगों का हाथ रहता है. उनका मानना है की पुरानी घास को जलाने से अच्छी और अधिक मात्रा में घास उगती है. नई घास की चाह में जो शरारती तत्व आग लगा रहे हैं. जबकि जंगलों में उगने वाली जड़ी-बूटियों और जंगल में रह रहे वन्य प्राणियों के लिए भी ये आग घातक सिद्ध हो रही है. जंगलों में धरती के भीतर रहने वाले दुर्लभ प्रजाति के कई कीट-पतंगे जलकर नष्ट हो चुके हैं. 

जंगलों में आग की विकराल घटनाओं को देखते हुए वन विभाग के कर्मचारियों को हाई एलर्ट पर रखा गया है. अगले चार दिन तक मौसम शुष्क रहने के कारण गर्मी और अधिक बढ़ने की संभावना है. इससे जंगलों में आग लगने की घटनाएं और बढ़ सकती हैं.

बगहा से माधवेन्द्र पाण्डेय की रिपोर्ट 


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