बिहार में बाढ़ः आपदा के बीच राशन वितरण को लेकर 50 हजार पैकेट तैयार, सामाजिक संगठनों का भी मिला साथ

बिहार में बाढ़ः आपदा के बीच राशन वितरण को लेकर 50 हजार पैकेट तैयार, सामाजिक संगठनों का भी मिला साथ

KATIHAR: बाढ़ की त्रासदी के बीच कटिहार जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए हर तरीके से प्रयासरत है। इसी के आलोक में बाढ़ पीड़ितों के लिए सूखा राशन पैकिंग का काम शुरू कर दिया गया है। सरकार द्वारा दिए गए टेंडर के बाद लगातार बाढ़ पीड़ितों तक सूखा राशन और अन्य जरूरी सामान पहुंचाने के लिए काम किया जा रहा है। अबतक 50 हजार फूड पैकेट का वितरण किया जा चुका है औऱ आगे भी यह कार्य जारी है। इसके लिए कर्मी रोटेशन के आधार पर 24 घंटे सेवा दे रहे हैं।

लोगों के लिए तीन तरह के पैकेट बनाए गए

आपदा विभाग संवेदक बिमल बेगानी ने बताया कि बाढ़ग्रस्त इलाके के लोगों के लिए 3 तरह के फूड पैकेट बनाए गए हैं। पहले पैकेट में चावल, दाल, आलू, माचिस और मोमबत्ती रहेगी। दूसरे पैकेट में बर्तन और जरूरी कपड़ों को पैक किया गया है। जबकि तीसरे पैकेट में चूरा, चीनी, नमक, माचिस और मोमबत्ती रहेगी। माचिस और मोमबत्ती आपात स्थिति के लिए लोगों को दी जा रही है।

बीते 15 दिनों से 24 घंटे जारी है सेवा

आपदा विभाग के संवेदक भुवन अग्रवाल ने बताया कि बीते 15 दिनों से यह सेवा लगातार 24 घंटे जारी है। आपदा प्रबंधन विभाग ने टेंडर के जरिए लोगों को जिम्मेदारी है, जिसे बखूबी रूप से निभाया जा रहा है। एक केंद्र से अब तक 50,000 से अधिक सूखा राशन से जुड़े राहत पैकेट तैयार कर जिला प्रशासन के निर्देश पर बाढ़ ग्रस्त क्षेत्र के अंचलाधिकारी को सुपुर्द किया जा चुका है और आगे भी बाढ़ पीड़ितों को सुविधा मुहैया करवाने के लिए यह काम लगातार जारी है।

सामाजिक संस्था भी बढ़ा रही मदद का हाथ

वहीं सुदूरवर्ती इलाके, जहां अब भी प्रशासन नहीं पहुंच पा रहा, वहां मदद का हाथ बढ़ा रहे हैं विभिन्न सामाजिक संस्था से जुड़े लोग। बाढ़ ग्रस्त क्षेत्र कुर्सेला में सरकार के तरफ से राहत कैंप चलाया ही जा रहा है, लेकिन राहत कैंप की व्यवस्था काफी नहीं है। ऐसे में कई सामाजिक संगठन लोगों के बीच सूखा राशन भी वितरित कर रहे हैं।

राशन लेने के मच जाती है लूट

जैसे ही सूखा राशन लेकर लोग बाढ़ ग्रस्त क्षेत्र तक पहुंचते हैं, लगभग अनाज लूट जैसे हालात बन जाते हैं। कुछ बाढ़ पीड़ित इस हालात को बयां करते हुए कहते हैं कि करें तो क्या करें वह लोग इतना मजबूत भी नहीं है की इस भीड़ में सुखा राशन लूट सके। वही राशन वितरण के लिए आए सामाजिक कार्यकर्ता कहते हैं अब तक हालात बेहद खराब है, इसलिए वे लोग अपने सामाजिक योगदान से हालात को सुधारने के लिए जुटे हुए है।

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