अपनी ही सरकार पर खाद्य आपूर्ति मंत्री ने जताई नाराजगी, कहा- नहीं हुआ किसानों का भुगतान

अपनी ही सरकार पर खाद्य आपूर्ति मंत्री ने जताई नाराजगी, कहा- नहीं हुआ किसानों का भुगतान

RANCHI : झारखण्ड के खाद्य आपूर्ति मंत्री सरयू राय अपनी ही सरकार के कामकाज से नाराजगी जाहिर की हैं. राय अपनी ही सरकार के कार्यों से अक्सर नाराज नजर आते है और आलोचना करने में कोई कसर नही छोड़ते है. एक बार फिर सरयू राय ने रघुवर सरकार पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि राज्य सरकार की ओर से आज किसान सम्मान निधि योजना समारोह आयोजन किया गया. वही दूसरी ओर जिन किसानों से उचित मूल्य और बोनस के आधार पर धान की खरीद विगत 31 मार्च 2019 के पूर्व हो चुकी है. उनमें से करीब 2,838 किसानों के न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदे गये धान की कीमत और बोनस की राशि का भुगतान लंबित है. उन्होंने कहा कि सरकारी खजाना से किसानों को सहायता राशि का भुगतान करने में  जितनी तत्परता होती है. उतनी ही तत्परता वैसे किसानों को भुगतान करने में होना चाहिये जिन्होंने पसीना बहाकर और निवेश कर धान उपजाया है.

खाद्य आपूति मंत्री ने कहा कि खरीफ की बुआई का समय आ गया है. किसान धान का बिचडा डाल रहे हैं. उन्हें खेती के लिये पूंजी की जरूरत है और उनकी अपनी पूँजी के बिना किसी कसूर के सरकार के पास फँसी हुई है. 30 मई 2019 को हुई विभाग की मासिक बैठक में संबंधित पदाधिकारियों को सख्त हिदायत दी गई थी कि वे किसानों को धान खरीद के बकाया का भुगतान 10 जून 2019 तक कर दें. अन्यथा उनके विरूद्ध कार्रवाई की जाएगी. उस दिन की बैठक में दिये गये जिलावार आंकड़ों के अनुसार 7,185 किसानों का लगभग 83 करोड रूपये का भुगतान लंबित था. 17 जून को हुई मासिक बैठक में बताया गया था कि 3,434 किसानों का लगभग 45 करोड़ रूपया का भुगतान अभी तक नहीं हो पाया है.

नियमानुसार जो किसान किसी पैक्स में अपना धान बेचेगा उसका भुगतान 7 दिन में हो जायेगा. प्रक्रिया यह है कि पैक्स की ओर से किसानों से खरीदा गया धान अविलम्ब पैक्स से उठाकर संबंधित चावल मिल में भेज दिया जायेगा. धान जैसे ही मिल में प्राप्त कर लिया जायेगा वैसे ही धान की कीमत किसान के खाता में भेज दी जायेगी. राज्य भर में कुल 34,247 किसानों से इस वर्ष 2,27,858 लाख टन धान की खरीद हुई है. जिसमें से 31,409 किसानों को लगभग 396 करोड रूपया का भुगतान हो गया है. लेकिन अभी भी 2,838 किसानों का लगभग 36 करोड़ रूपया का भुगतान लंबित है. कई जिलों में किसानों से खरीदा गया धान अभी भी पैक्स में पड़ा है. इसे मिल में नहीं भेजा गया है. 

यह भी व्यवस्था बनाई गई है कि किसानों से खरीदा गया धान मिल में पहुँचाने में कोई कठिनाई हो तो सरकार की ओर से राज्य खाद्य निगम उसे कब्जा में ले लेगा और पैक्स से उठाकर अपने गोदाम में रखेगा. धान गोदाम में पहुँचते ही किसान को धान का भुगतान हो जायेगा. पैक्स से चावल मिल में अथवा गोदाम में धान पहुँचाने की प्रक्रिया एक सप्ताह के भीतर पूरी हो जायेगी और सप्ताह के भीतर किसान को भुगतान हो जायेगा. लेकिन अनेक मामलों मे ऐसा नहीं हो पाया है और किसान भुगतान के लिये दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं. 

रांची से सुजीत कुमार की रिपोर्ट 


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