भारत में एक साल में पहली बार हुई इतने बाघों की मौत कि बाघ संरक्षण के तमाम दावे हो रहे फेल

भारत में एक साल में पहली बार हुई इतने बाघों की मौत कि बाघ संरक्षण के तमाम दावे हो रहे फेल

दिल्ली. सेव टाइगर्स के नाम पर हर साल भले ही करोड़ों रुपए का विज्ञापन और जन जागरूकता अभियान चलाया जा रहा हो, लेकिन देश में टाइगर यानी बाघों की स्थिति चिंतनीय है. नेशनल टाइगर कजर्वेशन अथॉरिटी ने वर्ष 2021 में भारत में बाघों की स्थिति को लेकर जो आंकड़ा जारी किया है वह चौंकाने वाला है. आंकड़ों के अनुसार भारत में 2021 में 29 दिसंबर तक कुल 126 बाघों की मौत हुई है. इनमें से 60 बाघों की मौत शिकारियों, हादसों और संरक्षित क्षेत्र के बाहर इंसानों के साथ मुठभेड़ में हुई है. 

प्राधिकरण की रिपोर्ट में कहा गया है कि बाघों की मौत के मामले में मध्‍य प्रदेश सबसे ऊपर है. मध्‍य प्रदेश में देश में सर्वाधिक 526 बाघ हैं लेकिन 2021 में यहां 42 बाघों की मौत हुई. इसी तरह 312 बाघों वाले महाराष्‍ट्र में 26 बाघों की मौत हुई जबकि देश में 524 बाघ के साथ दूसरा सर्वाधिक बाघ वाला राज्य कर्नाटक हैं. यहाँ इस वर्ष 15 बाघों की मौत हुई है. वहीं उत्‍तर प्रदेश में 173 बाघ हैं जिसमें 9 बाघों की मौत हुई है. 

एक वर्ष में देश में 126 बाघों की मौत के बाद भी नेशनल टाइगर कजर्वेशन अथॉरिटी का कहना है कि इस संख्या में कुछ और बढ़ोत्तरी हो सकती है. अंतिम आंकड़ों के आने के बाद इस साल मरने वाले बाघों की संख्या का स्पष्ट आंकड़ा आएगा. 

2018 की गणना के अनुसार देश में 2967 बाघों का बसेरा था. वहीं एनटीसीए 2012 से बाघों का रिकॉर्ड दर्ज कर रहा है. वहीं 2016 में देश में 121 बाघों की मौत हुई थी. अब 2021 में 126 बाघों की मौत को पिछले एक दशक में एक वर्ष में सर्वाधिक बाघों की मौत माना जा रहा है. 


Find Us on Facebook

Trending News