पूर्व सीएम मांझी ने फिर से की शराबबंदी की समीक्षा की मांग, कहा बार बार बोलना बेईमानी लगता है

पूर्व सीएम मांझी ने फिर से की शराबबंदी की समीक्षा की मांग, कहा बार बार बोलना बेईमानी लगता है

GAYA : नालंदा में जहरीली शराब से 5 लोगों की मौत पर गया में बिहार के पूर्व सीएम जीतन राम माँझी ने कहा नीतीश कुमार को इसपर समझना, सोचना और विचार करना चाहिए, जब पीएम कृषि कानून को वापस ले सकते है तो आप विचार करे।

गया में गोदावरी स्थित अपने आवास पर बिहार के पूर्व सीएम जीतन राम मांझी ने नालंदा में जहरीली शराब से 5 की मौत पर कहा कि शराब पर इतना बार बोल चुके है अब इस पर बोलना बेईमानी लगता है। नांलदा हीं नहीं और भी जगह पहले मौत हुई है। बोलेंगे तो इसे भाजपा या कुछ और लोग इसे दूसरे समझ जाते है। लेकिन बिहार सीएम नीतीश कुमार पता नही क्यों नही समझ पा रहे है। इसे प्रतिष्ठा का सवाल बना लिए है। कृषि कानून को जब पीएम नरेंद्र मोदी वापस ले सकते है तो शराब के नीति पर समीक्षा न करना यह कहा की बात है। समीक्षा करना हीं उचित होगा। पहले गोपालगंज में हुआ अब नालंदा में हुआ। बिहार में कहाँ नही जहरीली शराब से मौत हुआ है। शराब बनाने में केमिकल का लोग यूज करते है।  जो कमजोर वर्ग के है खाना मिला नही और शराब पीने का अभ्यस्त है तो यैसे में वह पी लेता है तो वह तो मरेगा हीं। गुजरात मे तो बिहार से पहले शराबबंदी लागू है महात्मा गांधी का जन्मस्थल है। उसी प्रकार से गुजरात मॉडल भी सरकार अपना ले तो उचित होगा।

उन्होंने कहा की शराब बन्द करना यह सिर्फ कह सकते है प्रैक्टिकल रूप से कर नही सकते है। हजारो सेना के जवान है जो शराब पीते है एक ढंग से पीते है।  वही हमने पहले भी कहा की रात 10 बजे के बाद बड़े बड़े लोग सोने के समय मे शराब ले रहे है। तो उनको कौन जान रहा है।  लेकिन जो गरीब तबके के लोग है अज्ञानतावश पेट मे खाना है नही और शराब पी ले रहे है और पुलिस पकड़ लेती है। 1991 शराब नीति में प्रावधान है कि कोई भी व्यक्ति शराब पीकर सार्वजनिक स्थान पर नही जा सकता है न किसी से झगड़ा कर सकता है। अब तो सुप्रीम कोर्ट भी कह रही है कि जमानत का नम्बर आने में हीं समय लग जाए रहा है। इस पर नीतीश कुमार को सोचना ,समझना और विचार करना चाहिए। 


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