पूर्व DGP 'सिंघल' बच जायेंगे फंसेंगे ? फर्जी CJ की पैरवी सुन IPS आदित्य को 'क्लीनचिट' दिये जाने के मामले को HC ले जाने की तैयारी...एक्शन न लेने पर कटघरे में सरकार

पूर्व DGP 'सिंघल' बच जायेंगे फंसेंगे ? फर्जी CJ की पैरवी सुन IPS आदित्य को 'क्लीनचिट' दिये जाने के मामले को HC ले जाने की तैयारी...एक्शन न लेने पर कटघरे में सरकार

PATNA:  बिहार के डीजीपी रहे एस. के. सिंघल भले ही सेवानिवृत हो गए हों लेकिन मुश्किलें खत्म नहीं हुई हैं.फर्जी चीफ जस्टिस की पैरवी सुनकर आईपीएस अधिकारी आदित्य कुमार को शराब केस में रिलीफ देने के मामले में वे बच नहीं सकते। नीतीश सरकार भले ही तत्कालीन डीजीपी सिंघल पर कोई कार्रवाई नहीं की हो लेकिन अब इस मामले को न्यायालय में ले जाने की तैयारी है। कोर्ट जाने से पहले बिहार के मुख्यमंत्री से लेकर मुख्य सचिव और गृह सचिव को लीगल नोटिस दिया गया है। सरकार के स्तर से अगर पूर्व डीजीपी एस. के सिंघल पर पर विभागीय कार्यवाही नहीं शुरू की जाती है तो मामला कोर्ट में जायेगा। पटना हाईकर्ट के वकील विजय कुमार साह की तरफ से मंगलवार को वकालतन नोटिस भेजा गया है। 

गया के पूर्व एसएसपी को दी थी क्लीन चिट 

गया के तत्कालीन एसएसपी आदित्य कुमार के खिलाफ सरकार के आदेश पर फतेहपुर थाने में 28 मई 2022 को मद्ध निषेध एवं उत्पाद अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया था। इस केस की समीक्षा डीजीपी एस. के. सिंघल के द्वारा की गई थी. सिंघल ने अपने आदेश में लिखा था, ''समीक्षा में यह निष्कर्ष निकला कि उक्त कांड में तत्कालीन वरीय पुलिस अधीक्षक गया आदित्य कुमार के विरूद्ध बिहार मद्ध निषेध एवं उत्पाद अधिनियम 2016 की धारा-51 के प्रावधानों के अंतर्गत वर्तमान प्राथमिकी कानूनी दृष्किकोण से उचित नहीं है। ऐसे में इस कांड के आईओ को न्यायालय में अंतिम प्रतिवेदन मिस्टेक ऑफ लॉ समर्पित करने का आदेश दिया जाता है। अन्य अभियुक्तों के संबंध में अलग से प्राथमिकी दर्ज कर अनुसंधान करने का आदेश दिया जाता है''।

नटवरलाल अभिषेक को डीजीपी ने मान लिया था असली चीफ जस्टिस 

दरअसल,डीजीपी रहे एस. के. सिंघल को बिहार के चीफ जस्टिस ने नहीं बल्कि एक नटवरलाल अभिषेक अग्रवाल ने दर्जनों बार फोन किया था। आर्थिक अपराध इकाई ने 15 अक्टूबर 2022 को केस दर्ज किया था। इस केस में उल्लेख किया गया है कि अभिषेक अग्रवाल ने बताया कि आईपीएस आदित्य कुमार के खिलाफ शराब केस खत्म कराने में उसने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आदित्य कुमार के कहने पर अभिषेक ने चीफ जस्टिस बनकर डीजीपी एसके सिंघल के मोबाईल पर फोन किया. नटवरलाल अभिषेक अग्रवाल ने डीजीपी सिंघल को व्हाट्सअप्प कॉल, नार्मल कॉल कर डीजीपी को झांसा में लिया और अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर आदित्य कुमार के हित में प्रशासनिक निर्णय लेने के लिए बाध्य किया. डीजीपी को फोन कर नटवल लाल अभिषेक पूरे रौब-दाब में उनसे बात कर सिंघल को दबाव में ले लिया. डीजीपी को विश्वास हो गया कि वह असली चीफ जस्टिस है। डीजीपी ने नटवरलाल अभिषेक अग्रवाल को असली मानते हुए सर-सर कहकर संबोधित करते थे. वह नाराजगी दिखाता तो सिंघल समय लेकर कॉल भी करते। यानि फर्जी चीफ जस्टिस को असली मानकर डीजीपी रहे सिंघल ने शराब कांड के अभियुक्त गया के तत्कालीन एसएसपी आदित्य कुमार का केस खत्म किया। 

मामले के खुलासे के बाद भारी बवेला मचा था। डीजीपी सिंघल की भारी किरकिरी हुई थी। तब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बचाव किया था और कहा था कि अब इकी सेवा 2 महीने बची है। यह कहकर मुख्यमंत्री ने फर्जी फोन कांड में फंसे और जालसाज आईपीएस आदित्य को क्लीनचिट देने में लपेटे में आये एस. के. सिंघल को बचा लिया था। इतने बड़े कांड का खुलासा होने के बाद भी सरकार के स्तर से कोई कार्रवाई नहीं हुई। हालांकि अभी भी यह मामला दबा नहीं है। पटना हाईकोर्ट के वकील ने मुख्य मंत्री, मुख्य सचिव,गृह सचिव को भेजे नोटिस में कहा है कि अगर 10 दिनों के अंदर तत्कालीन डीजीपी एस. के. सिंघल पर विभागीय कार्यवाही शुरू नहीं होती है तो उनके मुवक्किल उचित फोरम पर जायेंगे। 


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