महाराजा कॉलेज में वित्तीय अनियमितता का खेल उजागर, स्वतंत्र एजेंसी से जांच की मांग
PATNA: बिहार के महाराजा कॉलेज से कथित तौर पर बड़े घोटाले की खबर सामने आई है। दरअसल, वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले महाराजा कॉलेज के पूर्व प्राचार्य और जैन कॉलेज के वर्तमान प्राचार्य डॉ नरेंद्र कुमार द्वारा महाराजा कॉलेज में पद पर रहते हुए महज दो साल में लगभग तीन करोड़ की वित्तीय अनियमितता की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक हुई है। वहीं इस मामले के बाद राज्य की सियासी गलियारों में हड़कंप मच गया। कथित तौर पर प्राचार्य के द्वारा लगभग 2 करोड़ का घोटाला किया गया है। फिलहाल इस मामले पर विश्वविद्यालय परिसर में खामोशी छायी हुई है।
इस मामले में सीएम नीतीश को पत्र लिख महाराजा कॉलेज के पूर्व प्रधानाचार्य डॉ. नरेंद्र कुमार पर कार्रवाई कर मामले की जांच करने की अपील की गई है। पत्र में लिखा है कि महाराजा कॉलेज आरा में हुई घोर वित्तीय अनियमितता की जाँच के लिए वर्तमान प्रभारी प्रधानाचार्य ने एक प्राथमिक जाँच समिति का गठन किया था। समिति ने मात्र दो वर्षों के कार्यकाल की जाँच की है, जिसमें करीब साढ़े तीन करोड़ की वित्तीय अनियमितता पाई गई है। 'सूचना का अधिकार' अधिनियम के तहत इसकी जानकारी प्राप्त की गई है।
यह जांच महाराजा कॉलेज शिक्षक संघ ने वर्तमान प्राचार्य डॉ ओपी राय की पहल पर करवायी थी। तीन दिन पूर्व बिहार में उच्च शिक्षा और नयी शिक्षा नीति से जुड़ी एक गोष्ठी में इस जांच रिपोर्ट की चर्चा आयी थी। वहीं बिहार विधानसभा के बजट सत्र में भी तरारी विधायक सुदामा और डुमरांव विधानसभा क्षेत्र के विधायक अजित कुमार सिंह ने इस मामले को उठाया था। साथ ही इसकी जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराने की मांग की।
वहीं उसके बाद से विश्वविद्यालय परिसर में दबी जबान से कई तरह की बातें हो रही हैं। कोई खुलकर बोल नहीं रहा है। ज्ञात हो कि यह जांच रिपोर्ट कार्रवाई के लिए कुलपति के पास डेढ़ महीने से लंबित है, मगर अब सदन में आवाज उठने के साथ ही जांच रिपोर्ट की प्रति मुख्यमंत्री सचिवालय में विश्वविद्यालय के शिक्षकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की पहल पर जमा करा दी गयी है। वहीं शिक्षा से जुड़े राष्ट्रीय स्तर के विभिन्न सामाजिक संगठनों में मामले को लेकर गोलबंदी होने लगी है।
इनका मानना है कि वर्तमान जांच रिपोर्ट महज झांकी है। अगर कोई स्वतंत्र एजेंसी निष्पक्षता से जांच करे, तो डॉ. नरेंद्र कुमार के पूरे कार्यकाल के साथ ही विश्वविद्यालय के कई अन्य कॉलेजों में हुई करोड़ों रुपये की हेराफेरी का भंडाफोड़ होना तय है, जिसकी जद में कई चेहरे आ सकते है।