गाड़ी वाला आया घर से कचड़ा निकाल....क्योंकि अब इन कचड़ों से बनेगा जैविक खाद

गाड़ी वाला आया घर से कचड़ा निकाल....क्योंकि अब इन कचड़ों से बनेगा जैविक खाद

GAYA: शहर से निकलने वाले कचरे का समुचित प्रबंधन को लेकर गया नगर निगम काफी गंभीर है। इसी क्रम में मंगलवार की सुबह कचरे के निष्पादन को लेकर मेयर विरेंद्र कुमार उर्फ गणेश पासवान, डिप्टी मेयर अखौरी ओंकारनाथ उर्फ मोहन श्रीवास्तव एवं नगर आयुक्त सावन कुमार एवं स्थाई समिति के सदस्य विनोद यादव पार्षद प्रतिनिधि अरुण कुमार उर्फ लाला, नोडल पदाधिकारी शैलेन्द्र कुमार सिन्हा के साथ शहर के नैली स्थित डंपिंग यार्ड पहुंचे। जहां स्थल निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान कचरा निष्पादन के लिए कई कार्य योजना पर विशेष रूप चर्चा की गई। इसके अलावा तकनीकी पहलुओं पर विमर्श किया गया। वहीं कचरे के चारदीवारी बनाने का निर्देश संबंधित अधिकारी को दी गई है।

दिल्‍ली, भोपाल से सीख कर आए हैं कचरा प्रबंधन का तरीका

गौरतलब है कि शहर से प्रत्येक दिन ढाई सौ टन कचरा निकलता है । इसमें 60 फ़ीसद गीला एवं 40 फ़ीसदी सूखा कचरा होता है। इनका निष्‍पादन करना बड़ी समस्‍या की तरह है। एक सप्‍ताह पूर्व निगम के पांच सदस्यीय टीम मेयर डिप्टी मेयर, उपनगर आयुक्त अजय कुमार, सफाई के नोडल पदाधिकारी शैलेंद्र सिन्हा, सशक्त स्थायी समिति के सदस्य विनोद यादव ने दिल्ली, भोपाल एवं इंदौर शहर गई थी। वहां कचरा निष्‍पादन के प्रभावी तरीके की जानकारी ली गई। उसी के तहत मंगलवार को मेयर-डिप्‍टी मेयर ने कचरा निष्‍पादन के लिए डंपिंग ग्राउंड का जायजा लिया। मेयर गणेश पासवान ने कहा कि कचरे के निष्पादन हेतु आज डंपिंग ग्राउंड की स्थल निरीक्षण किया गया है। जल्द ही कचरे निष्पादन हेतु खाद बनाने वाले मशीन लगाया जाएगा।


वहीं डिप्टी मेयर मोहन श्रीवास्तव ने कहा कि स्वच्छ भारत मिशन के तहत गयाजी को कचरा मुक्त शहर बनाने व गया शहर स्वच्छ और सुंदर दिखे, इसके लिए गया नगर निगम के पांच सदस्यीय टीम ने गया से दिल्ली, भोपाल एवं इंदौर का दौरा किया और देखा गया कि कचरे निष्पादन के लिए कई मशीन अलग कार्य कर रही है। गया शहर में भी कचरा के निष्पादन की व्‍यवस्‍था जल्द से जल्द की जाएगी। कचरे निष्पादन हेतु मशीन लगाने एक वर्ष तय समय सीमा रखा गया है। उम्मीद है 6 महीने के अंदर यहां मशीन लगा दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि कचरा से जैविक खाद बनाने के साथ-साथ रस्सी तैयार करने पर भी काम चलेगा। 

जैविक खाद बनाने के लिए मशीनों की खरीदारी के साथ यहां हजारों लोगों को भी रोजगार के अवसर प्राप्त हो जाएंगे। साथ ही शेड का भी निर्माण कराया जाएगा। इसके तहत गीले कचरे से जैविक खाद तैयार किया जाएगा। वहीं सूखे कचरे से रस्सी तैयार होगी। साथ ही केमिकल डालकर कचरे के ढेर को छोटा किया जाएगा। उसपर कृत्रिम घास लगाए जाएंगे ताकि देखने में यह सुंदर लगे। निगम चहुमुखी विकास के लिए पूरी तरह अग्रसर है। आने वाला दिन में उम्मीद है कि गया शहर बिहार का सबसे स्वच्छ और सुंदर शहर  दिखेगा।

गया से मनोज कुमार की रिपोर्ट

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