जॉर्ज फर्नांडिस नहीं चाहते थे नीतीश बनें मुख्यमंत्री, 2005 में अपनों के विरोध के बाद भी भाजपा ने दिया था साथ

जॉर्ज फर्नांडिस नहीं चाहते थे नीतीश बनें मुख्यमंत्री, 2005 में अपनों के विरोध के बाद भी भाजपा ने दिया था साथ

पटना. नीतीश कुमार ने भले बुधवार को आठवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. लेकिन एक ऐसा दौर भी था जब उनके साथी नहीं चाहते थे कि सीएम पद की शपथ नीतीश कुमार लें. यह खुलासा किया है भाजपा के सुशील मोदी ने. उनका बुधवार को दावा किया कि नवंबर 2005 में जब एनडीए को बहुमत मिला तब तत्कालीन समता पार्टी के प्रमुख नेताओं जॉर्ज फर्नांडिस, प्रभुनाथ सिंह आदि ने नीतीश के सीएम बनने का विरोध किया था. मोदी ने दावा किया कि समता पार्टी के नेताओं के विरोध के बाद भी उन्होंने भाजपा आलाकमान को नीतीश के नाम पर राजी किया. उसके बाद ही नीतीश को मुख्यमंत्री बनाया गया और उन्होंने 2010 तक बिहार में पहली बार लगातार पांच साल तक सरकार चलाई. 

एनडीए से अलग होने नीतीश के निर्णय को विश्वासघात बताते हुए मोदी ने कहा कि भाजपा के उपकार के बाद भी नीतीश ने भाजपा को धोखा दिया है. उन्होंने कहा कि बिहार में एनडीए से नाता तोड़ने का जो नीतीश का  निर्णय है उसके पीछे मूल कारण था कि नीतीश खुद को देश का उप राष्ट्रपति बनाना चाहते थे लेकिन भाजपा इसके लिए तैयार नहीं थी. उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार के निकटस्थ जदयू नेताओं ने हाल ही भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से नीतीश कुमार को उप राष्ट्रपति बनाने की बात कही थी. हालांकि भाजपा ने इस पर विचार नहीं किया. नीतीश के एनडीए से नाता तोड़कर राजद के साथ जाने का यह एक प्रमुख कारण रहा. 


उन्होंने कहा कि 2020 के विधानसभा चुनाव में बिहार का अतिपिछड़ा वर्ग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर एनडीए के साथ आया था. नरेंद्र मोदी भी अतिपिछड़ा समाज से आते हैं और इसलिए बिहार का अतिपिछड़ा समाज एनडीए के साथ आया. बिहार 30 फीसदी अतिपिछड़ा समाज के वोटों का अपमान कर नीतीश ने भाजपा से नाता तोडा है. उन्होंने कहा कि 2015 में अतिपिछड़ा वर्ग नीतीश के साथ था जो अब पीएम मोदी के साथ है. इसलिए मोदी- भाजपा से नाता तोड़कर नीतीश कोई करिश्मा नहीं कर पाएंगे क्योंकि अतिपिछड़ा अब उनके साथ नहीं है. 

हालांकि सुशील मोदी के कथित दावों का जदयू नेताओं ने पलटवार किया है और उसे मनगढंत कहा है. जदयू नेताओं का कहना है कि भाजपा हमेशा ही नीतीश कुमार के सहारे बिहार में राजनीति करते रही. नीतीश के नाम पर भाजपा को वोट मिलता रहा और आज नीतीश ने जब जनहित में एनडीए से अलग होने का निर्णय लिया तो उनके खिलाफ बेबुनियाद बातें की जा रही है. 


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