क्या गिरिराज के खिलाफ वाकई साजिश रची जा रही है? आखिर ये खेल कौन खेल रहा है!

क्या गिरिराज के खिलाफ वाकई साजिश रची जा रही है? आखिर ये खेल कौन खेल रहा है!

जरा इस राजनीतिक विडंबना पर गौर कीजिए। भाजपा के कद्दावर नेता गिरिराज सिंह पत्रकारों से बात करते हुए कहते हैं कि मैंने 200 दफा प्रदेश अध्यक्ष नित्यानन्द राय को नवादा से ही चुनाव लड़ने की बात कही है। लेकिन उनकी एक नहीं सुनी गई। मतलब साफ है कि गिरिराज की आवाज को अनसुना कर दिया गया। आखिर भाजपा के इस कद्दावर हिंदूवादी छवि के नेता की आवाज को दबाने का खेल कौन खेल रहा है?

 अब जरा याद कीजिए बिहार की राजनीति में सत्ता पर काबिज हो चुके एनडीए की दूसरी पारी को। सब कुछ ठीक चल रहा था। गिरिराज नीतीश कैबिनेट में मंत्री के पद पर काबिज थे। 2014 के लोकसभा चुनाव को लेकर चर्चा का दौर शुरू हो चुका था,और इससे भी कहीं ज्यादा भाजपा का नेतृत्व कौन करेगा इसे लेकर राजनीतिक लबेदाबाजी भी शुरू हो गयी थी। इसी बीच गिरिराज ने नरेंद्र मोदी को लेकर एक आवाज दी उस आवाज़ का मजमून था कि देश केअगले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी होंगे।मतलब साफ हो गया था कि अब आडवाणी के नेतृत्व को लेकर भाजपा का एक खेमा विरोध पर उतर आया था। बिहार में इसकी अगुआई गिरिराज सिंह कर रहे थे।

इसका साइड इफेक्ट बिहार में में चल रही सरकार पर भी पड़ा।क्योंकि नीतीश कुमार को उस दौर में नरेंद्र मोदी का चेहरा दागदार दिखता था साथ ही देश के राजनीतिक नेतृत्व को लेकर क्षमताविहीन भी। इसके वाबजूद गिरिराज नरेंद्र मोदी का झंडा उठा जोर जोर की आवाज लगाते रहे। अंततः बिहार की सरकार गिरिराज की आवाज़ को बर्दाश्त नहीं कर पाई और बिखर गई। जदयू को राजद के साथ मिला और भाजपा विपक्ष की हैसियत में आ गया। लेकिन दूसरी तरफ गिरिराज की आवाज़ लगातार रंग दिखा रही थी। नरेंद्र मोदी लगातार अपने को राष्ट्रीय स्तर पर प्रोजेक्ट करने में जुटे रहे और अंततः वही हुआ जिसकी शुरुआत गिरिराज ने 2010 में ही कर दिया था। गोवा में नरेंद मोदी को एनडीए की तरफ से प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया गया।

     2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शानदार जीत दर्ज की ,गिरिराज भी नवादा से सांसद चुन लिए गए।लेकिन यहां भी विडम्बना देखिए की उस समय गिरिराज सिंह बेगूसराय सीट से चुनाव लड़ना चाह रहे थे नेतृत्व ने टिकट थमा दिया नवादा का।अब जब नवादा से लड़ना चाह रहे है तो कहा जा रहा है बेगूसराय चले जाइए। वाकई गिरिराज आहत हैं और क्षुब्ध भी ।

 बड़ा सवाल है कि मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के पक्ष में प्रधानमंत्री बनवाने के लिये सबसे पहले आवाज़ देने वाले गिरिराज के आवाज़ को दबाया क्यों जा रहा है। हालांकि गिरिराज की नाराज़गी से चौकस नेतृत्व ने उन्हें दिल्ली बुलाया है। गिरिराज भी कह रहे हैं कि कार्यकर्ता था,कार्यकर्ता हूँ और कार्यकर्ता रहूंगा। भूत, वर्तमान और भविष्य के बारे में जब कोई नेता बोलने लगे तो समझिये की भूत बहुत ही जबरा है। हालांकि दिल्ली दरगाह पर बैठे राजनीतिक दरवेशों ने भूत उतारने हेतु नेता से कार्यकर्ता बने गिरीराज बाबू को दिल्ली बुलाया है लेकिन देखने वाली बात होगी कि नेता पर कार्यकर्ता बनने का चढ़ा भूत उतरता है की नहीं ।कुल मिलाकर गिरिराज के विद्रोही आवाज का असर कितना होगा यह वक्त बताएगा।थोड़ा इंतजार कीजिये।

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