नीतीश राज में होता है 'बॉडीगार्ड' घोटाला! नियमों को ताक पर रखकर 'शेखर' जैसे चहेतों को मिलता है कार्रबाईनधारी अंगरक्षक

नीतीश राज में होता है 'बॉडीगार्ड' घोटाला! नियमों को ताक पर रखकर 'शेखर' जैसे चहेतों को मिलता है कार्रबाईनधारी अंगरक्षक

PATNA: बिहार के सुशासन राज में वर्दी वाले बॉडीगार्ड जमीन माफियाओं में बांटे जा रहे। जिस राज्य में आम आदमी की सुरक्षा भगवान भरोसे है उसी राज्य में अगर किसी जमीन कारोबारी को वर्दी वाला 2-2 कारबाईनधारी बॉडीगार्ड मिले जाये तो क्या आप इसे सुशासन का राज कहेंगे? लेकिन बिहार के सुशासन राज में ऐसा ही होता है। पुलिस के बड़े अधिकारी नियमों को तार-तार कर चहेतों में अत्याधुनिक हथियार वाला बॉडीगार्ड बांटते हैं. जमीन कारोबारी चंद्रशेखर को कारबाईनधारी 2-2 बॉडीगार्ड देने के मामले का खुलासा हुआ तो पुलिस के वरीय अधिकारी भी भौचक्के हैं लेकिन आधिकारिक तौर पर कोई भी अधिकारी साफ-साफ बोलने से बच रहे। बताया जा रहा कि मुख्यालय के मौखिक आदेश पर जमीन कारोबारी को अत्याधुनिक हथियार वाले बॉडीगार्ड दिये गये थे। जानकार बताते हैं कि जिस शख्स को पुलिस ने कार्रबाईन धारी बॉडीगार्ड दिया वो मुजफ्फरपुर,चकिया इलाके में जमीन का बड़े स्तर पर वैध-अवैध धंधे में संलिप्त है।   

बिहार में बॉडीगार्ड देने में होता है बड़ा खेल

 वैसे बिहार में बॉडीगार्ड के खेल कोई नया नहीं है। इसमें बड़े स्तर पर वारा-न्यारा किया जाता है। आरटीआई से जब 2010 से लेकर 2020 तक दिये गये बॉडीगार्ड के बारे में जानकारी मांगी गई तो इसमें बड़ा खुलासा हुआ था। आरटीआई कार्यकर्ता शिवप्रकाश राय ने 2020 में आरटीआई से जानकारी मांगी थी. रिपोर्ट में बताया गया था कि बिहार में सरकारी बॉडीगार्ड देने में भारी गड़बड़ी की गई है। दरअसल जिला स्तर पर स्थानीय वीआईपी को जो बॉडीगार्ड दिए गए उनसे पैसे की वसूली करनी थी। जिला सुरक्षा समिति बाह्य व्यक्तियों को भुगतान के आधार पर अंगरक्षक की प्रतिनियुक्ति कर सकती है। इसके बदले में बॉडीगार्ड लेने वाले शख्स को पैसे का भुगतान करना पड़ता है। यहीं पर भारी गड़बड़ी हुई।स्थानीय स्तर पर बॉडीगार्ड तो दिए गए लेकिन उसके पैसे पैसे की वसूली नहीं हुई या काफी कम हुई।बिहार के कई जिलों में बॉडीगार्ड देने के नाम पर करोड़ों रू सरकार के बकाया हैं लेकिन उसकी वसूली करने में सिस्टम फेल कर गया .

बॉडीगार्ड दिया जाता है लेकिन पैसे की नहीं होती वसूली

 आरटीआई एक्टिविस्ट ने वर्ष 2010 से 2020 के दौरान सूबे के 40 पुलिस जिलों में जिला पुलिस को सामान्य नागरिकों के जीवन की सुरक्षा हेतु उपलब्ध कराये बॉडीगार्ड पर कुल व्यय राशि से संबंधित जानकारी मांगी गई थी। इसके बाद लेखा परीक्षा विभाग ने आरटीआई एक्टिविस्ट को 82 पन्नों की पूरी सूची दी. रिपोर्ट में यह बताया गया कि तमाम जिलों के एसपी बकाये राशि की वसूली का सिर्फ आश्वासन दिया। आरटीआई एक्टिविस्ट को मिली जानकारी के अनुसार बक्सर में बॉडीगार्ड के नाम पर करीब 43 लाख का बकाया है। कैमूर में 22 लाख की वसूली नहीं हो पाई। वहीं अररिया में 45 लाख,बगहा में 11 लाख,वैशाली में सबसे अधक 76 लाख,रोहतास में 67 लाख,औरंगाबाद में 22 लाख,लखीसराय में भी करीब 11 लाख और गया में 28 लाख का बकाया है। जिसकी वसूली नहीं हो पा रही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सभी जिलों के एसपी ने बकाये पैसे की वसूली की बात कही है। हालांकि हाल के दिनों तक जिलों के एसपी ने कितनी राशि वसूल की इसकी जानकारी नहीं है। 

आरटीआई एक्टिविस्ट ने खोल दी थी पोल

आरटीआई कार्यकर्ता शिवप्रकाश राय ने बताया कि हमने 2010 से लेकर 2020 तक आम लोगों को दिए गए बॉडीगार्ड के एवज में पैसे वसूली को लेकर भारतीय लेखा परीक्षा विभाग से जानकारी मांगी थी। जो जानकारी दी गई है उसमें एक-एक जिले में 40-50 लाख रू बकाया है। पूरे बिहार की बात करें तो इसमें बड़ा घोटाला हुआ है और इसमें करोडो़ं की सरकारी राशि की वसूली नहीं हो पाई.

चंपारण डीआईजी ने भी जताया था आश्चर्य

 इसके बाद एक बॉडीगार्ड को तो वापस कर लिया गया जबकि दूसरे जिले से लिया गया कार्बाइनधारी बॉडीगार्ड को वापस नहीं लिया गया है। दरअसल जमीन कारोबारी को मोतिहारी और मुजफ्फरपुर जिले से एक-एक कार्बाइनधारी बॉडीगार्ड मिला था। खबर के बाद मुजफ्फरपुर पुलिस ने गार्ड वापस ले लिया जबकि मोतिहारी पुलिस की सहानुभूति बरकरार है। इस संबंध में जब चंपारण रेंज के डीआईजी से पूछा गया तो उन्होंने भी आश्चर्य जताया। आगे कहा उन्हें इस मामले की जानकारी नहीं है।पूरे मामले की एसपी मोतिहारी से जानकारी लेंगे । 

मुजफ्फरपुर-मोतिहारी जिला से दिया गया था बॉडीगार्ड

बता दें, मोतिहारी-मुजफ्फरपुर का जमीन कारोबारी चंद्रशेखर को मुजफ्फरपुर और मोतिहारी जिला से बॉडीगार्ड दिया गया था। दोनों जिलों के पुलिस अधिकारी इस जमीन कारोबारी से इतने खुश थे एक-एक बॉडीगार्ड उपलब्ध करा दिये। अब जबकि मामले का खुलासा हुआ तो मुजफ्फरपुर पुलिस ने अत्याधुनिक हथियार वाले बॉडीगार्ड को वापस कर लिया है। मुजफ्फरपुर पुलिस का कहना है कि चंद्रशेखर को दिया गया एक बॉडीगार्ड वापस कर लिया गया है जबकि दूसरा बॉडीगार्ड मोतिहारी जिला से मिला है। बड़ा सवाल यही है कि एक जमीन कारोबारी को बॉडीगार्ड किसके आदेश पर उपलब्ध कराया गया? क्या अंगरक्षक देने के जो नियम बनाये गये हैं उसका पालन किया गया ? 

जमीन माफिया पर मेहरबान है सुशासन की पुलिस

अब हम आपको पूरी कहानी बताते हैं। एक वीडियो सामने आया है जिसमें एक शख्स दो-दो कारबाईनधारी बॉडीगार्ड लेकर चल रहा है। वह जमीन कारोबारी दो-दो कारबाईनधारी बॉडीगार्ड लेकर ऐसे चल रहा मानो कोई बड़ा नेता या फिर बड़ा अधिकारी हो। क्यों कि छोटे अधिकारियों को अमूमन कार्रबाईनधारी बॉडीगार्ड नहीं मिलते। उन्हें पिस्टल वाला या केवल एक कारबाईनधारी बॉडीगार्ड दिया जाता है। जब पता किया गया तो जानकारी लगी कि वो मुजफ्फरपुर-मोतिहारी इलाके का जमीन कारोबारी चंद्रशेखर है। वह मुजफ्फरपुर के भगवानपुर इलाके में रहता है और मोतिहारी -मुजफ्फरपुर में जमीन का वैध-अवैध धंधा करता है। जिसमें पुलिस का भी अपरोक्ष रूप से संरक्षण मिला हुआ है। 

दो-दो कारबाईनधारी बॉडीगार्ड लेकर दिखा रहा था धौंस

कुछ दिन पहले चंद्रशेखऱ नाम के एक शख्स का मुजफ्फरपुर इलाके में जमीन का विवाद फंसा। यह शख्स उसी जगह पर अपने दोनो कारबाईनधारी बॉडीगार्ड के साथ गया था। वहीं का वीडियो वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में सफेद हाफ शर्ट में दिख रहा शख्स चंद्रशेखर बताया जाता है । उसके अगल-बगल दो-दो कारबाईनधारी बॉडीगार्ड चल रहे हैं। बॉडीगार्ड लेकर वह स्पॉट पर धौंस जमाने गया था लेकिन दांव उल्टा पड़ गया और स्थानीय लोगों ने विरोध कर दिया। वीडियो में दिख रहा है कि जब लोगों ने चंद्रशेखर का विरोध किया तो इसके दोनो कारबाईनधारी हथियार तान रहे. इसके बाद विरोधी जब भारी पड़ने लगे तो जमीन कारोबारी वहां से निकलना चाहा। दोनो बॉडीगार्ड उसे वहां से सुरक्षित निकाल कर चले गये। इस मामले में जमीन कारोबारी ने कुछ दिन पहले मुजफ्फरपुर के अहियापुर थाने में जानलेवा हमले का केस दर्ज कराया और तीन लोगों को आरोपित किया। केस में उल्लेख किया कि पिस्टल के बट से वार किया गया। जमीन कारोबारी ने आवेदन में लिखा कि शोर मचाने पर बॉडीगार्ड ने उन्हें बचाया। इसके बाद दूसरे पक्ष ने भी केस दर्ज किया

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