पटना हाईकोर्ट में जजों के आधे पद खाली, मुकदमों के निपटारे पर हो रहा असर

पटना हाईकोर्ट में जजों के आधे पद खाली, मुकदमों के निपटारे पर हो रहा असर

PATNA : सुप्रीम कोर्ट समेत देश के हाईकोर्ट व निचली अदालतों में सुनवाई के लिए लंबित मामलों की संख्या तीन करोड़ से अधिक हैं। इनमें सिविल, क्रिमिनल और अन्य मामले शामिल हैं। मुकद्दमों की जल्द सुनवाई और निपटारे नहीं होने के कारण न्यायपालिका में आम लोगों का भरोसा घटा है। छोटे छोटे मामलों की सुनवाई में काफी समय लग जाता हैं,जिस कारण मुवक्किलों को न सिर्फ धन और समय की बर्बादी होती हैं, बल्कि न्यायापालिका की विश्वनीयता और उपयोगिता पर भी प्रश्नचिन्ह खड़े होते है।

इसके लिए जहाँ मुकदमों की संख्या लगातार बढ़  रही हैं,वहीं विकल्प के रूप मे लोक अदालत के गठन से बहुत प्रभावकारी परिणाम नहीं मिले हैं। लोक अदालत में दोनों पक्षों की सहमति से मामलों का निपटारा होता हैं। लेकिन आपसी सहमति नहीं होने पर फिर सामान्य कोर्ट का ही सहारा लेना पड़ता हैं। इस कारण मुकद्दमों की संख्या में प्रभावी कमी नहीं आ पाती हैं। दूसरी ओर जजों की संख्या भी जनसंख्या के अनुपात में काफी कम हैं। यहाँ तक कि कोर्ट में जो जजों के स्वीकृत पद हैं,वहां भी बड़ी तादाद में पद रिक्त पड़े हैं।

पटना हाईकोर्ट में जनसंख्या के अनुपात में लगभग 70 या 75 जज होने चाहिए। लेकिन फिलहाल पटना हाईकोर्ट में 18 जज ही कार्यरत हैं।अभी बाहर के हाईकोर्ट से 4 जज पटना हाईकोर्ट में स्थानांतरित किये गए दिनों। साथ ही पटना हाईकोर्ट में वकील कोटा से 4 जजों की बहाली हुई हैं।  पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट के जज जस्टिस राजन गुप्ता, कर्नाटक हाईकोर्ट की जस्टिस पी बी बजनथ्री और राजस्थान हाईकोर्ट के जज संजीव प्रकाश शर्मा का स्थानांतरण पटना हाईकोर्ट में हो गया है। इससे पूर्व पटना हाईकोर्ट में केरल हाईकोर्ट के जज जस्टिस ए एम बदर का भी स्थानांतरण किया गया है। इस तरह पटना हाईकोर्ट में लगभग 23 जज कार्यरत होंगे। पटना हाईकोर्ट में जजों के स्वीकृत पदों की संख्या 53 हैं। इसका अर्थ हैं कि अभी भी जजों के स्वीकृत पदों मे आधे पद रिक्त पड़े रहेंगे। 

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